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बुक फेयर: सिविल सर्वेंट्स की अनोखी पहल, गांव-गांव तक पहुंचा रहे लाइब्रेरी

Priyanka.Singh5@timesgroup.com

विश्व पुस्तक मेले में इस बार कई स्टार्ट-अप भी देखने को मिल रहे हैं, जो छोटे बच्चों की पढ़ाई को और आसान बनाने से लेकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा ही एक स्टार्ट-अप गाजियाबाद से ताल्लुक रखने वाले कुछ सरकारी कर्मचारी लेकर आए हैं। इनका अभियान है कि वे देश के हर गांव तक लाइब्रेरी पहुंचाएं और तमाम विषमताओं से जूझ रहे ग्रामीण अंचल को ज्ञान के प्रकाश से रौशन कर सकें। हालांकि, उनके द्वारा प्रस्तावित लाइब्रेरी पुराने पुस्तकालयों जैसी नहीं हैं। इनमें किताबों के बजाए कंप्यूटर पर ज्यादा फोकस किया गया है। हॉल नंबर एक में लगे स्टॉल 'ग्राम पाठशाला' में किताबों को डोनेट करने से लेकर पाठशाला से जुड़ने के लिए विजिटर्स से आग्रह किया जा रहा है। एक अनूठा आग्रह विजिटर्स से यह भी है -


एग्जीबिटर डॉ. अजयपाल सिंह ने बताया कि ग्राम पाठशाला की शुरुआत हमने अपने गांव लोनी से की थी और इसमें शामिल होने वाले ज्यादातर लोग पब्लिक सर्वेंट है। हमारे समूह में सम्मिलित सभी लोग सरकारी नौकरी करते है। इसकी शुरुआत करने का मकसद सिर्फ एक है कि गांव- गांव तक लाइब्रेरी पहुंचाई जा सके। हमें सरकारी नौकरी की परीक्षा की तैयारी करने के लिए बीस बीस किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। कभी बस से तो कभी ट्रेन से सफर करते थे। कुछ लोग तैयारी करने के लिए गांव छोड़कर शहर की तरफ पलायन कर लेते थे और अभी तक भी यही हाल है। ऐसे में हमने सोचा क्यों ना गांव तक लाइब्रेरी पहुंचाई जाए।

इसके लिए हमने पंचायत से पंचायत घर का एक हॉल लिया और पांच लाख रुपये एकत्रकर सत्तर लोगों के लिए लाइब्रेरी की सुविधा शुरू की। लेकिन, हमने देखा कि इस लाइब्रेरी में सत्तर से अधिक लोग पढ़ने के लिए आ रहे हैं, तो हमने आसपास के गांव के लोगों को भी इसके लिए जागरूक किया। साढ़े तीन साल में सोलह सौ से ज्यादा ग्राम पाठशाला खुल चुकी हैं और हम सात राज्यों तक इस मुहिम को फैला चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा लाइब्रेरी उत्तर प्रदेश में हैं। ये सभी लाइब्रेरी नि:शुल्क हैं। उन्होंने बताया कि हमारे ग्रुप में कई लोग दिल्ली पुलिस से ताल्लुक रखते हैं, ऐसे में कई पुलिस स्टेशनों में भी गरीब बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनाई गई हैं। जैसे लाजपत नगर थाने और ग्रेटर कैलाश थाने में एक लाइब्रेरी है। नॉर्थ ईस्ट में एक आईपीएस ऑफिसर ने 5 सब-डिजिवजन में अलग-अलग लाइब्रेरी बनाई थीं। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी में मौजूद सभी किताबें डोनेट की गई हैं। यहां छठवीं से लेकर बारहवीं तक की एनसीईआरटी की किताबें मौजूद हैं। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भी विभिन्न एग्जाम की पुस्तक उपलब्ध हैं। इसके अलावा हमारा फोकस कंप्यूटर की फैसिलिटी पर ज्यादा है।


हॉल नंबर-1 में लगे विंटेज किताबों के स्टॉल का भी एक अलग ही क्रेज देखने को मिल रहा है। लोग अपनी मनपसंद किताबों को ढूंढते हुए इस स्टॉल पर पहुंच रहे है। साथ ही वहां पर मौजूद एग्जीबिटर से विभिन्न तरह की किताबों की मांग कर रहे है। हालांकि, सभी की फरमाइश पूरा करना एक्जीबिटर के लिए इतना आसान भी नहीं है। एग्जीबिटर ने बताया कि विंटेज किताबों को सहज कर रखना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन, लोगों काफी उत्साहित है। कई लोगों ने किताबों के नाम बताए है, जिन्हें हम फेयर खत्म होने के बाद उन्हें देंगे। उन्होंने बताया कि यहां सन 1810 की किताबें भी मौजूद है। इसके अलावा आपको पुराने जमाने के फिल्मों की कैसेट भी यहां मिल जाएंगी।
मेले का बड़ा आकर्षण है ग्राम पाठशाला
विश्व पुस्तक मेले में टीम ग्राम पाठशाला आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। विशेषकर युवा भारी संख्या में ग्राम पाठशाला के स्टॉल पर पहुँच रहे हैं और ग्राम पाठशाला की मुहिम से जुड़ने की प्रेरणा ले रहे हैं। 
दरअसल, जिस मेले में हर प्रकाशक अपनी पुस्तकें बेचने के लिए आया हो उनके बीच में एक ऐसा स्टॉल देखकर लोग मंत्रमुग्ध क्या किंकर्तव्यविमूढ हो रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यह एक ऐसा स्टॉल है जिस पर कुछ भी बेचा नहीं जा रहा है, बल्कि लोगों से अपने-अपने गाँवों में लाइब्रेरी बनवाने की केवलमात्र अपील की जा रही है।
भारत को पुस्तकालयों का देश बनाने का ग्राम पाठशाला का आह्वान लोगों के अंतर्मन को छू रहा है और परिणाम आ रहे हैं।
साथ साथ प्रयास ऐसे भी
शब्दशिल्प की प्रस्तुति



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