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आशीषी संदेश को जानें

शुभ कामनाओं के साथ दिया आशीष ऐसा होता है, जिसका प्रभाव जीवन को पूरी तरह परिवर्तित कर देने की क्षमता रखता है। इसलिए अपने से बड़े विशेष आयोजनों पर अपने प्रियजनों को आशीष अवश्य देते हैं। आशीष विभिन्न प्रकार के अर्थ समाहित रखता है। गांवों क्या शहरों को सुशोभित करने वालों में आज भी जियो, खुश रहो जैसे शब्द आशीष के रूप में कहे जाते हैं और आमतौर पर जब कभी भी हम अपने बड़ों के पास जाते हैं तो कामना बताए बगैर ही हमको उनका आशीष प्रणाम के साथ स्वतः मिलता है और जिस शुभकामना से आयु, बल, विद्या व बुद्धि बढ़े वही आशीष है। प्रत्येक व्यक्ति के मन में इन चारों की बढ़ोतरी की कामना होती है। आशीष का प्रभाव निश्चित रूप से पड़ता है और मन में जितना अधिक आदर होगा आपको आशीष उतना ही मिलेगा।

बिन मांगे मोती मिले की तर्ज पर कविवर कृष्णदत्त शर्मा कृष्ण ने एक आशीषी संदेश तैयार किया तो आप भी उसका आनंद लीजिए।

श्रीमती मौली (शेफाली) बिटिया को उसके जन्मदिवस दिनांक 27 जनवरी, 2024 पर कृष्ण अंकल की आशीषी बधाई

 मौली बिटिया जन्मदिवस पर आशीषी है तुम्हें बधाई।

 घर कानन की कली मनोहर दिखी आज ज्यादा हर्षाई।

                                                                                        जीवनसाथी धीरज जी हैं निज जीवन में धीरजधारी।

सदा तुम्हारे साथ बैठकर बातें करते हैं मनुहारी।

'प्रथम'-'पार्थ' पुत्र दो प्यारे मात-पिता के आज्ञाकारी।

आज तुम्हारे जन्मदिवस पर खुशियां मार रहीं किलकारी।

ऋद्धि-सिद्धि-समृद्धि खुद ही घर में सदा चहकती पाईं।

घर कानन की कली मनोहर दिखी आज ज्यादा हर्षाई॥१।।


मम्मी तुमको सदा सौंपतीं आशीषों से भरी गगरिया। 

दोनों भैया-भाभी तुमको भेज रहे हैं स्नेह गठरिया। 

तुम्हें भतीजे और भतीजी बुआ-बुआ आदर से कहते।

देवलोक में बैठे पापा तुम्हें लाडली 'लाडो' कहते।

तुमने दो दो परिवारों में सम्मानित निज छवि बनाई।

घर कानन की कली मनोहर दिखी आज ज्यादा हर्षाई।।२।।


अंकल कृष्ण जन्म से तुमको कहते अपनी बिटिया रानी। 

सुख से जीवन जियो सदा ही और रहो बनकर महारानी।

बाबा-दादी देवलोक से तुम्हें देखकर हैं हर्षाते।

आशीषों के सुमन सदा ही अपनी गुडिया पर बरसाते। 

शत्याधिक वर्षी हो जीवन ईश्वर से है आस लगाई।

घर कानन की कली मनोहर दिखी आज ज्यादा हर्षाई॥३।।


सास-ससुर की शीतल छाया तुम पर रहती हर पल छाई। 

अखण्ड रहे सौभाग्य तुम्हारा आशीषों की झड़ी लगाई।

 एक सुन्दर गुलदस्ता घर है सदा फैलती महक मिली है।

 एक दूजे के लिए समर्पण सदा भावना मिली खिली है।

 है आशीष सदा जीवन में दिखो सभी को तुम मुस्काई।

 घर कानन की कली मनोहर दिखी आज ज्यादा हर्षाई।।४।।


 कृष्णदत्त कृष्ण - राशि; दिनांक 27-1-24


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