आप सभी मित्रों एवं स्वजनों को सपरिवार नववर्ष 2024 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाओं के साथ कल के राष्ट्र सेवा में संलग्न पुलिस अधिकारी और आज के शब्दशिल्पी रमनपाल जी से नव वर्ष पर लेखन का आग्रह किया गया तो उन्होंने आप और हम सभी के स्वस्थ,सुखी,सम्पन्न एवं दीर्घायु जीवन की कामना इस प्रकार की। 'जय हिंद, जय बलिदानी, वन्दे मातरम'
मानवता के काम जो आए, कुछ ऐसा हम कर पाएं।
नये वर्ष में बीते कल की, सभी गलतियां बिसराएं।।
मानवता के काम जो आए, कुछ ऐसा हम कर पाएं।
अपराधों को सहना और शह देना भी अपराध ही है।
अपराध न पनपे दुनिया में, रोलें, कर्तव्य हमारा भी है।
सहयोग पुलिस और जनता में हो, तो अपराधी थर्राए।।
मानवता के काम जो आए, कुछ ऐसा हम कर पाएं।
भारत के गौरव की खातिर, वीरों ने यहां कुर्बानी दी है।
गर्वित ना हो भारतीयता पर, किस्मत का वो मारा ही है।
देश की खातिर जिएं,जरूरत पड़ें तो उस पर मर जाएं।।
मानवता के काम जो आए, कुछ ऐसा हम कर पाएं।
बीते वर्ष में तो युद्धों ने, घायल सकल मानवता की है।
युद्धों से विध्वंस ही होता, नहीं किसी ने शिक्षा ली है।
अमन चैन से ही दुनिया का, हल हर मसला हो जाए।।
मानवता के काम जो आए, कुछ ऐसा हम कर पाएं।
वासुधैव कुटुम्बकम वाली, नव वर्ष में आस जगी है।
सभी दोष हो जाएं दूर वो, जिनसे दुनिया गई ठगी है।
विश्वगुरु हो भारत अपना, दुनिया आश्रम बन जाए।।
मानवता के काम जो आए, कुछ ऐसा हम कर पाएं।
-रमन 'सिसौनवी'
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