नवल वर्ष नव आशा लेकर हर जीवन में मुस्काया।
हर जन इसका आगे बढ़कर स्वागत करके हर्षाया।
विगत वर्ष की छूट गई हैं सभी निराशा जन जन की।
नवल ज्योति जल उठी आज है सब में भावी जीवन की।
पूर्ण होएंगी सभी कामना पली हुई सब के मन की।
नवल वर्ष में कमी न होगी सम्पन्नता वैभव धन की।
सपन सलोनों को हृदय में जगा पुन: है दिखलाया।
हर जन इसका आगे बढ़कर स्वागत करके हर्षाया।।१।।
अपने रामलला सदियों से झेले वनवासी जीवन।
कितनों ने उनकी मुक्ति को प्राण किये अपने अर्पण।
त्रिपाली लख उनका जीवन हर हिन्दू मन रोता था।
जन्मभूमि में लल्ला बैठें सोच सपन में खोता था।
इसी वर्ष ने आकर लल्ला मन्दिर में है बिठलाया।
हर जन इसका आगे बढ़कर स्वागत करके हर्षाया।।२।।
राम लला अब आये विराजे राम राज भी आयेगा।
नए वर्ष में हर कोई अपने देखे सपन सजाएगा।
पूर्ण विश्व में रहे शांति यह भारत का मूल मन्त्र है।
सत्य अहिंसा धर्म के आगे टिक न पाया कभी तन्त्र है।
हिंसक और अधर्मी मानव अंत समय है पछताया।
हर जन इसका आगे बढ़कर स्वागत करके हर्षाया।।३।।
नव पीढ़ी को नये वर्ष का सन्देशा यह पावन है।
सुखी रहे हर कोई जग में मंत्र यही मनभावन है।
आओ मिलकर नये वर्ष में करें ईश से यह वन्दन।
नहीं जगत में होने पाये कभी भूल से भी क्रन्दन।
मात्र भलाई करने में ही भला सभी का है पाया?
हर जन इसका आगे बढ़कर स्वागत करके हर्षाया।।४।।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें