सम्मानित मित्रो 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इस पावन अवसर पर यह काव्यपुष्प भगवान श्रीराम को वन्दन सहित आप सभी को बधाई एवं शुभकामनाओं सहित समर्पित हैं।
जय हिंद, वन्दे मातरम, जय श्रीराम
सदियों का निर्वासन सबने, मिलकर के निपटाया है।
जन्म राम का हुआ जहाँ पर, मन्दिर वहीं बनाया है।।
सदियों का निर्वासन सबने, मिलकर के निपटाया है।
विध्वंस हुआ था मन्दिर का, बनना बहुत जरूरी था।
राम के नाम पे आंच न आए, कर्म यही मजबूरी था।
मार्ग हुआ प्रशस्त फैसला, न्यायालय का आया है।।
सदियों का निर्वासन सबने, मिलकर के निपटाया है।
पुरुषोत्तम श्रीराम का मंदिर भी, उत्तम ही होना था।
दुर्भाग्य से सदियों तक, ना छत थी ना ही बिछौना था।।
ऐसा भव्य बना मन्दिर, अब सबका मन हर्षाया है।।।
सदियों का निर्वासन सबने, मिलकर के निपटाया है।
नेक नियत होती तो ऐसा, पहले भी हो सकता था।
हिन्दू मुस्लिम भाईचारा, भी मौलिक हो सकता था।।
देर हुई पर अच्छा है कि, सदपुरुषों ने अपनाया है।।।
सदियों का निर्वासन सबने, मिलकर के निपटाया है।
कुछ बातों ने पीड़ा भी दी, उन बातों को नहीं होना था।
ईश्वर की मर्जी से ही, सब हुआ है जो भी होना था।
देश चले उस दर्शन पर अब, श्रीराम से जो पाया है।
सदियों का निर्वासन सबने, मिलकर के निपटाया है।
-रमन 'सिसौनवी'
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