प्राचार्य का संबोधन
"आज हम अपना 75वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं और 76वें में प्रवेश कर रहे हैं। आज के दिन ही 26 जनवरी 1950 को भारत को अपना संविधान मिला था, जिसको बनाने में हमारे संविधान निर्माता ने दिन-रात एक कर दिया। इसमें नागरिकों के मौलिक कर्तव्य और अधिकारों की बात की गई। यदि हम सब अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी से करें तो हमें अपने अधिकार अपनेआप ही मिल जाएंगे। जिस प्रकार संविधान ने हमें कर्तव्य के बारे में बताया उसी प्रकार विद्यालय में भी हम सबके अपने-अपने कर्तव्य निर्धारित हैं। शिक्षकों का कर्तव्य है कि वे छात्रों का शिक्षण कार्य विद्यार्थियों की रुचि के अनुसार करें और उसका ज्ञान कक्षा में अंतिम पंक्ति में बैठे विद्यार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित हो। विद्यार्थियों का भी यह कर्तव्य है कि वे अपने शिक्षकों की बातें ध्यानपूर्वक सुनें और समयबद्ध तरीके से उस कार्य को करें जिससे वे जीवन के हर क्षेत्र में अग्रणी रहें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में छात्रों के सर्वांगीण विकास की जो परिकल्पना की गई है वह तभी साकार होगी, जब हम विद्यार्थियों के व्यावसायिक कौशल के साथ-साथ क्रियात्मक कौशल का भी विकास कर सकें। भारत अभी आजादी का अमृत महोत्सव बना रहा है और हमारे प्रधानमंत्री का सपना है कि हम विकासशील से विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आ जाएं। भारत जब अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे कर रहा होगा उस समय भारत विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आगे होगा। आज भारत विभिन्न क्षेत्रों में विश्व पटल पर छाया हुआ है, चाहे वह दक्षिणी क्षेत्र पर उतरने वाला पहला देश हो या आदित्य L -1 को स्थापित करने वाला। आज के दिन हम शपथ लें कि हम संविधान के मूल कर्तव्यों की अनुपालन सच्चे मन से करें यही देश को आजाद कराने के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सहित उन सभी महान विभूतियों के प्रति, जिन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, हमारा सच्चा नमन होगा।"
निष्कर्ष रूप में मुख्य अतिथि ने भारत की आज़ादी में भाग लेने वाली महान विभूतियों और भारतीय संविधान के निर्माण में अपनी महती भूमिका निभाने वाले बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर एवं अन्य सभी गणमान्यों के प्रति अपना आदर प्रकट किया। राष्ट्र की एकता और अखंडता के साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को अपने जीवन में नैतिक मूल्यों के साथ शिक्षा प्राप्त करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में माननीय मुख्य अतिथि द्वारा छात्र-छात्राओं के बीच मिष्ठान वितरण भी किया गया।
शब्दशिल्प की पहल पर तैयार
उम्दा
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर आयोजन एवं उम्दा संदेश,हार्दिक शुभकामनाएं
जवाब देंहटाएं