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गतिविधियां सिखाती हैं


दुनिया भर में शिक्षा का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है और शिक्षा अर्जित करने में भ्रमण विविध उद्देश्यों से हो सकता है और उस से विद्यार्थियों समेत अन्य लोगों को भी विभिन्न प्रकार से लाभ हो सकता है। फोकस करना भी सिखाता है भ्रमण। सुबह की ताजा हवा और प्रकृति के हरे-भरे मनोरम दृश्यों के बीच भ्रमण करने से आपके मन और तन, दोनों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है। एक नए अध्ययन से पता चला है कि हरे-भरे स्थानों का भ्रमण करने से ना केवल ज्ञानार्जन होता है अपितु ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का भी विकास होता है। यह अध्ययन अमेरिका के यूटा विश्वविद्यालय में किया गया था, जिसमें बयानबे महिला-पुरुषों को सम्मिलित किया गया था। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जिन महिला-पुरुषों ने प्रकृति के बीच चालीस मिनट व्यतीत किए, तथ्यों को स्मरण रखने और ध्यान केंद्रित करने की उनकी क्षमता में सुधार हुआ, जबकि शहरी लोगों में ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया। अध्ययन में शामिल एक प्रतिभागी के अनुसार, प्रकृति के बीच चालीस मिनट टहलने से उसे गाड़ी चलाते हुए अपना ध्यान सड़क पर केंद्रित रखने में आसानी हुई जो दर्शाता है कि भ्रमण का प्रभाव अपरोक्ष रूप से ही सही हमारी नैत्यिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, मस्तिष्क के वे हिस्से, जो दैनिक आवागमन के दौरान अत्यधिक उपयोग किए जाते हैं, उन्हें भी एक छोटे-से भ्रमण से आराम मिलता है। भ्रमण वास्तविक दुनिया के अनुभव प्रदान करते हैं, कक्षाओं से परे सीखने के दायरे को बढ़ाते हैं, टीम वर्क को बढ़ावा देते हैं और छात्रों समेत समस्त संबंधित लोगों को विभिन्न संस्कृतियों और वातावरणों से परिचित कराते हैं। पर्यटन के लाभों की संख्या गंतव्य, शैक्षिक फोकस और जुड़ाव की गहराई जैसे कारकों पर निर्भर करती है। आइए दो भ्रमणों को उदाहरण के रूप में लेते हुए कुछ समझने का प्रयास करते हैं।
इनमें एक भ्रमण अबोध बालकों संबंधी ऐसा था जब पर्वों के शुभ अवसर पर मिलकर जरूरतमंद लोगों को साथ लेकर खुशियां ही बांट दी गईं। 
'नींव' संस्था ने छज्जूपुर गांव के साधनहीन बच्चों को शिक्षित करने की मुहिम चला रखी है। वहाँ के शशिप्रभा मेमोरियल पब्लिक स्कूल छज्जूपुर (परतापुर), मेरठ में प्रतिदिन साधनहीन बच्चों को साक्षर करने के लिए 'नींव' संस्था नि:शुल्क कक्षाएं चलाती है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर 'नींव' संस्था के द्वारा जरूरतमंद निर्धन बच्चों को ठंड से बचाव के लिए स्कूल के द्वारा जूते व ड्रेस प्रदान की गई। डॉ. उपदेश वर्मा, राष्ट्रीय समन्वयक 'नींव' संस्था ने बच्चों को शिक्षा का महत्व भी समझाया। 
समाज के संपन्न वर्ग का सांकेतिक हितकारी रूप
इस अवसर पर गाज़ियाबाद स्थित एम.एम.एच. कॉलेज से पधारे प्रोफेसर राकेश राणा जी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग ऐसे ही पवित्र हृदय बने रहना। देखना जीवन में कोई भी बाधा नहीं आ पाएगी। उन्होंने बताया कि कैसे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम जी शिक्षा की वजह से ही छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रपति के पद तक पहुँच पाए। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देवेंद्र नागर जी ने भी बच्चों का मनोबल बढ़ाया।
बच्चों ने कवितायें व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। सभी ने 'नींव' संस्था द्वारा किये जा रहे कार्यक्रमों की प्रशंसा की व आगे भी गांव के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का प्रण लिया। स्कूल के बच्चों के लिए सर्दी के गर्म कपड़ों, जूतों और गर्म पानी की बोतल वितरण हेतु आर्थिक सहयोग के लिए डॉ. सुनील भाटी और संदीप भाटी सहित समाजशास्त्र की शिक्षिका डॉ. भावना, सीमा गुप्ता एवं सुनीता सिंह व डॉ. राकेश राणा ने सहभागिता की! संस्था सभी का आभार व्यक्त करती है! इस अवसर पर 'नींव' के अध्यक्ष अधिवक्ता हरिदत्त वर्मा, प्राचार्य कुंवरपाल सिंह, धर्मेंद्र जी, सचिन जी, मनोज जी, दुर्गेश जी व अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
उपरिवर्णित के अतिरिक्त एक अन्य भ्रमण शैक्षणिक उद्देश्यों से हस्तिनापुर का किया गया। इसके लिए अभिभावकों को यह अपील प्रेषित की गई कि 
प्रिय अभिभावको! हमारा अनुभव हमारे वार्डों को सही तरीके से विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है, और हम आपके विचारों को सुनने की पूरी कोशिश कर रहे हैं! स्वयं को बेहतर बनाने और आपके संतुष्टि सर्वेक्षण को पूरा करने के लिए थोड़ा समय निकालने में हमारी सहायता करें। आपकी प्रतिक्रिया हमारे बच्चों के भविष्य को आकार देने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और आपके धन्यवाद के रूप में, हम आपके अगले कक्षा पैकेज में विविध परिवर्तन की पेशकश कर रहे हैं। आपकी अंतर्दृष्टि हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, और हम एक साथ विकसित होने के लिए उत्साहित हैं। नमस्ते। 
टीम नारायण विद्यापीठ
फिर इस भ्रमण का कार्यक्रम तय हुआ और भ्रमण पूर्व बालकों को कुछ सामान्य
एक अन्य भ्रमण देश की विधायिका के दोनों सदनों संबंधी था, जब एम.एम.एच. कालेज गाजियाबाद के समाजशास्त्र विभाग के शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा एक शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस अध्ययन भ्रमण में देश की संसद के दोनों सदनों लोक सभा और राज्यसभा सहित संसद भवन में स्थापित पुस्तकालय का भ्रमण किया गया। समाजशास्त्र विभाग के सभी शिक्षकगण और छात्र/छात्राएं संसद भवन के सेंट्रल हाल और कॉमन हाल का अवलोकन किया। संसद की तरफ से एक सहायक श्री सुशील कुमार को पूरे संसद परिसर का दौरा कराने के लिए भ्रमण करने वाली टीम के साथ भेजा गया। उन्होंने लोकसभा व राज्यसभा के सत्र संचालन के दौरान जिन नियमों व कायदों का पालन करना अनिवार्य होता है उन सबको विस्तार से समझाया। साथ ही यह भी कि संसद में किस तरह माननीयों के बैठने की व्यवस्था का निर्धारण होता है वह सीट विभाजन समझाया। लोकसभा व राज्यसभा के ढांचे और महत्वपूर्ण चीजों के बारे में बताया। उसके बाद सभी विधार्थी और शिक्षकगण लंच करके सेंट्रल हाल में पहुँचे और वहाँ पर उन्होंने उस पल को महसूस किया जहाँ पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देश की आज़ादी की घोषणा की थी। इसके बाद छात्र- छात्राओं ने संसद परिसर में स्थापित गाँधी जी की मूर्ति के सम्मुख एकत्र होकर फोटो सेशन किया। 

वहां से सब संसद भवन परिसर के प्रतिष्ठित पुस्तकालय में पहुंचे। जहाँ पर 3,500,00 पुस्तकों का अपुल भंडार देखा। यह पुस्तकालय भारत देश का दूसरा विशालतम पुस्तकालय है। चकित कर देने वाला दृश्य था। संसद भवन के पुस्तकालय में सन् 1947 से पूर्व के सभी महत्वपूर्ण अखबारों को संग्रहित करके रखे गया हैं। संसद भवन के पुस्तकालय में संविधान की वह प्रति भी नाइट्रोजन गैस से सुरक्षित करके रखी गई है, जो संविधान समिति ने अपने हाथो से तैयार की थी। गाँधी साहित्य को गंधियाना और नेहरू साहित्य को नेहरुयाना के नाम से गैलरी बनाकर विशेष रूप से संगृहीत किया गया है। समाजशास्त्र वीथिका को विशेष रूप से समय लगाकर सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों के द्वारा देखा गया। अंत में शाम को वही कैंटीन में सूक्ष्म जलपान के साथ विविध चर्चाओं को कर टूर को उपयोगी बनाया। भ्रमण में शिक्षक वर्ग ने छात्रों की तमाम किस्म की जिज्ञासाओं को शांत करने का यथासंभव प्रयास किया।
ऐसी गतिविधियों का आयोजन विविध उद्देश्यों से किया जाता है।
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