विवरण
सम्मानित मित्रो!
कल २२ जनवरी, २०२४ को उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या में श्रीराम जी के मन्दिर में होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के शुभ अवसर पर शब्दशिल्पी रमनपाल जी को वर्ष 1957 मे अपने जन्म से एक वर्ष पूर्व रिलीज हुई फिल्म 'नया दौर' का यह लोकप्रिय गीत याद आ गया:-
"ये देश है वीर जवानों का-----।"
उन्हें लगता है कि भारत के नये दौर की शुरुआत हो चुकी है। तब उनकी इस काव्य रचना का सृजन होता है, सर्वसमाज और समस्त मित्रों को समर्पित है।
जय हिन्द, जय भारत, वन्दे मातरम।
कविता
पूरी दुनिया आनन्दित है।
श्रीरामोत्सव का क्या कहना।।
ये श्रीराम वाला देश है भाई।
इस देश का यारों क्या कहना।।
श्रीरामोत्सव का क्या कहना।।
तब चौदह वर्ष रहे थे वन में।
अब पाँच सदी से निर्जन में।।
भक्तों को कष्ट पड़ा सहना।।।
श्रीरामोत्सव का क्या कहना।।
भक्तों ने जब ठाना मन में।
उतर गये वो राम के रण में।।
सब साथ चले भाई-बहना।।
श्रीरामोत्सव का क्या कहना।।
यहां राम बसे है कण-कण में।
और श्रद्धा उनकी जन-जन में।।
फिर टेंट में उनको क्यूँ रहना।।।
श्रीरामोत्सव का क्या कहना।।
है लहू का रंग मन्दिर सृजन में।
मरहम थी राम ऋचा क्रंदन में।।
मन्दिर है अथवा राम का गहना।।।
श्रीरामोत्सव का क्या कहना।।
-रमन 'सिसौनवी'
सम्मानित मित्रो!
आज २२ जनवरी, २०२४ को रामोत्सव का दिन इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों मे लिखा गया। मेरे लिए यह दिन दुगनी खुशी लेकर आया कि अयोध्या मे राम लला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही हमारे गांव सिसौना के राम मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सभी विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा समारोह मे मुझे सपरिवार शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर कुछ विचारो ने काव्य रूप लिया, तो आप सभी को समर्पित है।
जय श्रीराम, जय हिंद, वन्दे मातरम।
राम प्रतिष्ठित हुए,
प्रतिष्ठा लेकिन बढ़ी हमारी है।
विश्वगुरु बनने की,
अब ये आई अपनी बारी है।।
राम प्रतिष्ठित हुए,
आजादी के उत्सव को तो,
हमने कब देखा है।
शायद वैसा होगा जैसा,
रामोत्सव को देखा है।।
राम लहर से टूटी अब,
जनता की खुमारी है।।
राम प्रतिष्ठित हुए,
राजनीति होती रही,
भक्तों ने सपना देखा है।
कब कैसे क्या होना,
यह तो विधि का लेखा है।।
जनता जनार्दन खुश,
वो ही तो राम दुलारी है।।
राम प्रतिष्ठित हुए,
हमने गांव मे अपने,
यह उत्साह नहीं देखा है।
जैसा माहौल अयोध्या में,
वैसा ही हमने देखा है।।
मेरे गांव का मंदिर ही,
मेरी अयोध्या प्यारी है।।।
राम प्रतिष्ठित हुए,
आस्था जैसी हो,
वैसा ही किस्मत का लेखा है।
ऐसे शासन की आशा,
जो श्रीराम का देखा है।।
श्रद्धा का अपमान सदा,
पडता आया भारी है।।
राम प्रतिष्ठित हुए।।
-रमन 'सिसौनवी'
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