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शिक्षा की महत्ता को समझ जीवन में उतारने वाली पूनम रानी

परिचय

साथियो! आज हमारी अतिथि हैं डॉ. पूनम रानी, जो एस.एस.डी. इंटर कॉलेज मेरठ में अध्यापिका हैं। शिक्षण कार्य से विलग उनको अनेक अवसरों पर पुरस्कृत कर उनके साथ साथ उनके परिजनों का मान भी बढ़ाया जा चुका है। भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के 'कला उत्सव' में भी वो प्रतिभाग कर चुकी हैं। विविध स्पर्धाओं में वो जज की भूमिका निभा चुकी हैं और समय-समय पर विविध विषयों पर आधारित सेमिनारों में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं। मृदुभाषी और अपने विषय की ज्ञाता पूनम जी अपने शैक्षिक दायित्वों के साथ ही साथ गृहिणी का दायित्व भी बखूबी निभा लेती हैं। आइए आज उनसे कुछ चीजें समझने का प्रयास करते हैं। 

बातचीत

प्रश्न १. पूनम जी, आपका मुख्य विषय क्या रहा है और उसका चयन करने के पीछे क्या कारण रहे?

उत्तर - "मेरा मुख्य विषय चित्रकला रहा है। यह विषय मुझे बचपन से ही अत्यधिक प्रिय रहा है। चित्रकला एक ऐसा विषय है जो सभी की आंखों को आनंद की अनुभूति प्रदान करता है। चित्रकला के माध्यम से हम अपनी अभिव्यक्ति को श्रेष्ठतम रूप से व्यक्त कर सकते हैं।"

प्रश्न २. एक अभिभावक के तौर पर क्या अपने विद्वत्ता वाले विषय में पढ़ने के लिए आप अपने बालकों को प्रेरित कर पाईं?

उत्तर - "मैंने अपने अभिभावकों से यह सीखा और जाना कि एक अभिभावक के तौर पर ऐसा कुछ करना कतई भी उचित नहीं जो जीवन में हस्तक्षेप के जैसा लगे। मैंने इस शिक्षा को समझा और क्योंकि चित्रकला मेरी पसंद का विषय है, तो इसको चुना। बच्चों को जो विषय पसंद हैं वही विषय उन्हें चुनने में उनका भी साथ दिया।"

प्रश्न ३. क्या विवाह के उपरांत भी आपने पढ़ाई की यदि हां तो कुछ विवरण दीजिए।

उत्तर - "हां जी विवाह से पूर्व मैंने राजनीतिशास्त्र से एमए किया था और विवाह के उपरांत परिजनों के उत्साहित करने पर विवाह के उपरांत भी पढ़ाई जारी रखी और मैंने बी.एड. किया। उसके पश्चात चित्रकला में एम.ए. व पी.एच-डी. की।"

प्रश्न ४ - स्कूल में आपकी सर्वप्रिय छात्रा कौन है और किस कारण से वह सर्वप्रिय है?

उत्तर - "इस प्रश्न का उत्तर देना तो बहुत ही कठिन इसलिए है, क्योंकि मुझे अपनी सभी छात्राएं बहुत प्रिय हैं और उनमें से किसी एक का नाम बताना मेरे लिए बहुत ही मुश्किल काम है। अनेक छात्राएं पढ़कर जा चुकी हैं जो अब कई जगह कार्य भी कर रही हैं। वर्तमान में बारहवीं कक्षा की नेहा और ग्यारहवीं कक्षा की सबा मुझे बहुत प्रिय हैं तो इसलिए क्योंकि उनको मैं जो भी कार्य सौंपती हूं वह मेरे अनुरूप ही उसको पूर्ण करती हैं।"

प्रश्न ५. जीवन में शिक्षा ग्रहण कर उससे आप कैसे अपनेआप को लाभान्वित महसूस करती हैं?

उत्तर - "शिक्षा का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है और महिला के जीवन में तो इसका विशेष महत्व है। यथोचित शिक्षा ग्रहण करके ही मैं शिक्षा के क्षेत्र में यह पद प्राप्त करने योग्य हो सकी और अपने परिवार वालों की तथा स्वयं मैं  भी समाज भी समाज में अपनी एक अलग पहचान बना पाई। मैंने अपने बच्चों को भी समय-समय पर शिक्षा का महत्व समझाते हुए उन्हें उच्च शिक्षा अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उनका सहयोग किया है।"

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