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सफलता के लिए ऊर्जा और ताकत है इच्छाशक्ति


    आपको यदि लगता है कि आप जीतने के लिए पैदा हुए हैं, तो इसके लिए आपको अपने अंदर के विजेता को उबारने के लिए जीतने की योजना बनानी होगी और स्वयं को तैयार करना होगा। तभी आप जीतने की अपेक्षा कर सकते हैं। यह एक तथ्यपरक वास्तविकता है और इसका साक्षात और नवीनतम उदाहरण सामने तब आया जब इकहरे बदन की दो स्थानीय बच्चियों किंजल और रिया ने स्कूली क्रिकेट की उन्नीस वर्ष से कम आयु के क्रिकेटरों की २०२३-२४ की राष्ट्रीय स्पर्धा में उत्तर प्रदेश को हर स्तर पर विजयी कराने में प्रमुख भूमिका निभाई और इनमें से रिया तो एक मैच में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भी खेली और अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। अंततः उत्तर प्रदेश की क्रिकेट एकादश ट्रॉफी 🏆 को कब्जे में करने में सफल रही। साथ ही खेलों में ही यूनिवर्सिटी स्तर की खेल स्पर्धाओं में कभी फुटबाल टीम का हिस्सा रहे खिलाड़ी अक्षय, जो एक पैरा खिलाड़ी हैं, ने आश्चर्यजनक तरीके से जेवलिन थ्रो के माध्यम से एथलेटिक्स में भी अपनी इच्छाशक्ति के बल पर दम दिखा दिया। नौ साल की उम्र में हर्ष फायरिंग का शिकार हुए अक्षय को अपना बायां हाथ गंवाना पड़ा था। दो बहनों के अकेले भाई अक्षय ने एक हाथ गंवाने के बावजूद हौसला नहीं छोड़ा। अब तक अक्षय पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में शानदार प्रदर्शन कर राज्य स्तर पर दो स्वर्ण पदक झटक चुके हैं। और! अब अपनी जिजीविषा से ही उन्होंने नेशनल खेलों में जेवलिन थ्रो में कांस्य पदक जीता है। समाज में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जायेंगे जो सिद्ध कर देंगे कि लोगों की जिंदगी इस इच्छाशक्ति के बलबूते ही बदल गई।   

   जीवन में जीतने के लिए योजना और उसका आधार इस बिल्कुल स्पष्ट दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि आखिर आप चाहते क्या हैं, क्योंकि बिना दृष्टि या उद्देश्य के आप अपना लक्ष्य नहीं निर्धारित कर सकते, और बिना लक्ष्य कोई पैमाना तय नहीं कर पाएंगे कि आप जीवन में किस प्रकार आगे बढ़ रहे हैं। आपके भविष्य के लिए स्पष्ट लक्ष्य होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह आपकी इच्छा के सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है; जैसे कि सुनित की पत्नी और हरनंदी का पुत्र गुर्दा रोग से जब बुरी तरह प्रभावित हो गए तो गुर्दा बदलने के डॉक्टरी परामर्श के उपरांत उन दोनो ने स्वयं अपने गुर्दे उनको देना तय किया। यह एक बेहद कठिन निर्णय था, लेकिन लक्ष्य बिलकुल स्पष्ट था। अब जब ऐसा निर्णय फलदायी होगा तो एक नजीर बन जाएगा। दरअसल इच्छा वह मंत्र है, जो स्थायी  सफलता के लिए ऊर्जा रूपी ईंधन और ताकत का काम करती है। 

    इच्छाशक्ति के साथ ही कुछ गुण; ईमानदारी, चरित्र, विश्वास, समर्पण, प्रेम और निष्ठा; भी आप में जरूर होने चाहिए या आपको हासिल करने चाहिए, ताकि आप श्रेष्ठतम परिणाम प्राप्त कर सकें। ये गुण उच्च स्तर पर पहुंचाने वाली सीढ़ी के रूप में देखे जा सकते हैं। अन्य है, सफल होने के लिए तैयारी। तैयारी से आशय है कि आप सफलता के लिए खुद को तमाम संसाधनों से लैस करते हैं ठीक उस प्रकार जिस प्रकार पद्मश्री घोषित सेठपाल ने सीमित शिक्षा के बूते ही एक शोधार्थी की तरह अपने प्रयास कृषि क्षेत्र में जारी रखे और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ ही न जाने कितने प्रयोग किए और पद्मश्री की उपाधि प्राप्त की तो कृषि और उस संबंधी गतिविधियों में स्वयं को उत्कृष्ट सिद्ध करके। स्वशोध से जो ज्ञान अर्जित करते हैं और अपनी तरफ से हर तरह का सहयोग देने के लिए उद्यत रहते हैं, उनकी योजना और प्रयासों के अनुसार काम आगे बढ़ते हैं। सेठपाल सिंह ने अपने समस्त ज्ञान को भारत देश की विधायिका के समक्ष संसद के सदन लोकसभा में गत वर्ष २६ जनवरी २०२३ के उपलक्ष्य में २७ जनवरी को आयोजित सहमिलन में देश को शिरोधार्य किया। आमंत्रण के प्रत्युत्तर में सारे ज्ञान को देश को समर्पित करते हुए उन्होंने जो पत्र दिया उसको निम्न पंक्तियों से समझा जा सकता है। उसके भाव ये थे - "लोकतंत्र के लिए संसदीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) के तत्वावधान में दिनांक 27 जनवरी, 2023 को आयोजित संवादात्मक सत्र में सम्मिलित होकर में असीम गौरव की अनुभूति कर रहा हूँ। 

इस क्रम में मेरा इस पत्र के माध्यम से आपसे आग्रह है कि कृषि क्षेत्र में अपने स्तर से विविध तरीकों को अपनाकर मैं व्यक्तिगत तौर पर लाभान्वित हो चुका हूँ और अब आपके द्वारा दिये सम्मान के उपरांत मुझमें आत्मविश्वास और बढ़ा है तथा मैं अब केंद्रीय शासन का सहयोग यदि मिले तो बड़ी परियोजनाओं पर भी काम कर सकता हूँ।"

    इच्छाशक्ति के साथ योजना और उस ही क्रम में तैयारी का समावेश होता है। योजना बनाना और तैयारी करना बंद कर देते ही सफलता भी पीछा छुड़ा लेती है। इसलिए यदि योजनाकार लगातार सफलता के लिए खुद को तैयार करने में जुटे रहते हैं, तो सफलता की उम्मीद भी कर पाते हैं। सफलता के लिए यह भाव ही आपको अपेक्षा की ताकत और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली जिजीविषा से रूबरू कराता है। सकारात्मक अपेक्षा का अंतिम फल उम्मीद से जुड़ा होता है और यही उम्मीद आपको आगे खींचती है तथा आपके समस्त प्रयासों का कारक होती है। 

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