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संभावनाओं से भरी बच्चियां

परिचय

साथियो! हमारे से बात करने के लिए साथ में है प्राणप्रण से क्रिकेट में अपना करियर बनाने में संलग्न दो बच्चियां रिया और किंजल। ये दोनों बच्चियां ग्रामीण अंचल से हैं और रिया के माता-पिता कविता-सोनू निवासी ग्राम ऐंची खुर्द, जबकि किंजल के माता-पिता मनप्रीत-पुष्पेंद्र निवासी ग्राम हाफिजपुर हैं। इन दोनों बच्चियों में रिया ऐंची खुर्द (मवाना) स्थित स्कूल कृष्णा वंदना पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत है, जबकि किंजल मेरठ स्थित एक स्कूल में। इनका चयन उत्तर प्रदेश से स्कूल गेम्स की बालिका वर्ग की अंडर-19 क्रिकेट चैंपियनशिप के लिए हो गया है। दोनों बच्चियां परस्पर मित्र भी हैं और दृढ़संकल्प के साथ अपने भविष्य को संवारने में और अपने अभिभावकों को गौरवान्वित करने में संलग्न हैं।

बातचीत

प्रश्न 

१. बच्चो! अलग अलग बताओ कि आपने अपने अपने भावी जीवन के लिए क्या लक्ष्य निर्धारित किया है?

उत्तर 

रिया - सर, अनंतिम लक्ष्य भारत की महिला क्रिकेट टीम में प्रतिभाग करना तथा देश का प्रतिनिधित्व करना ही है।

किंजल - मेरा भी यही दृष्टिकोण है।

प्रश्न 

२. स्कूल स्तर पर प्रदेश के लिए खेलते हुए आपको कैसा लग रहा है?

उत्तर 

रिया व किंजल - हमें स्कूल 🎒 का प्रतिनिधित्व करते हुए अच्छा लग रहा है और काफी कुछ सीखने को मिल रहा है।

प्रश्न 

३. आप लोग क्रिकेट कब से खेल रही हो और क्रिकेट में आपकी दिलचस्पी कैसे बढ़ी?

उत्तर 

रिया - कई वर्षों से क्रिकेट खेल रही हूं व गांव के गली क्रिकेट ने मुझको काफी उत्साहित व प्रोत्साहित किया।

किंजल - मैं विगत चार वर्षों से क्रिकेट खेल रही हूं। मेरे पापा की क्रिकेट अकादमी थी। उसने भी मुझको प्रोत्साहित किया। मेरे पापा मुझको अकादमी में साथ लेकर जाते थे तो प्रशिक्षु बच्चों के समर्पित भाव ने भी मुझको प्रेरित किया।

प्रश्न

 ४. क्या आप दोनों के परिवारों में पहले कोई क्रिकेट से किसी भी रूप में जुड़ा रहा है?

उत्तर 

रिया - मेरे पापा और मेरे अंकल।

किंजल - मेरे पापा।

प्रश्न 

५. क्रिकेट का प्रशिक्षण आप कैसे प्राप्त कर पा रही हैं और क्या क्रिकेट की समझ विकसित करने के लिए क्रिकेट साहित्य का अध्ययन भी करती हैं?

उत्तर 

रिया - मैं अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हूं और निरंतर आगे बढ़ने के लिए दृढसंकल्पित हूं। क्रिकेट साहित्य में तो नहीं लेकिन क्रिकेट के नियमों को जानने में अवश्य रुचि है।

किंजल - मैं भी अकादमी जाती हूं और मेरी कोच छाया मैडम हैं। हमारी अकादमी का नाम है छाया करहाना क्रिकेट प्रशिक्षण अकादमी। मैं भी क्रिकेट साहित्य का अध्ययन नहीं कर पाती हूं।

प्रश्न 

६. यदि आपको अवसर मिले तो क्या विदेश जाने के लिए भी आप तैयार हैं?

इस प्रश्न का उत्तर दोनों ही ने हां में दिया।

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