भजन
तेरी माया है अपरम्पार।
मिला न इसका कोई पार।
प्रभु मैं भटक रहा दिन रात,
मिला न अब तक तेरा द्वार।
घिरा हूँ जग के माया जाल।
काट दे कुछ तो मेरा जाल।
जगा दे मन में भक्ति भाव,
भजूं जो तुमको मैं हर हाल।
नहीं जीवन में कोई सार।
व्यर्थ है यह सारा संसार।
यदि न लूँ मैं तेरा नाम,
और न पाऊँ तेरा प्यार।
प्रभु मैं भटक रहा दिन-रात,
मिला न अब तक तेरा द्वार।। १।।
मेरा मन रहता है बेचैन।
याद में बहते हैं ये नैन।
हुआ है लुप्त सभी ही ज्ञान।
दिला दे मुझको थोड़ा चैन।
तू ही इस जग का है आधार।
तू ही हम सबका पालनहार।
नाथ मैं बालक हूँ नादान,
मुझे नहीं देना नाथ बिसार।
प्रभु मैं भटक रहा दिन-रात,
मिला न अब तक तेरा द्वार।।२।।
करूँ भक्ति तेरी भगवान।
मुझे दे दे इतना-सा ज्ञान!
कभी न हुए धर्म के काम,
किया न मैंने तेरा ध्यान।
तुझे मैं कब से रहा पुकार।
मेरा भी कर दे अब उद्धार।
तेरी कृपा का भूखा नाथ,
शरण में ले लो अब करतार।
प्रभु मैं भटक रहा दिन-रात,
मिला न अब तक तेरा द्वार॥३॥
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