आत्मविश्वास के बिना कर्म कोई नहीं जीवन में होता।
आत्मविश्वास से ही केवल लक्ष्य सिद्ध जीवन में होता।
नन्हा बालक अपने मन में चलने से पहले घबराता।
क्या धरती पर चल पाऊंगा भाव इसी में खोया पाता।
हाथ थामकर मात पिता ही चलने का विश्वास जगाते।
चलने से जो भय लगता है उसके मन से दूर भगाते।
जगते ही विश्वास स्वयं में वो चलकर खुश मन में होता।
आत्मविश्वास से ही केवल लक्ष्य सिद्ध जीवन में होता।।१।।
पढ़ना लिखना आगे बढ़ना जीवन में है बहुत जरूरी।
लेकिन बैठे बैठे ही तो हो नहीं सकती इच्छा पूरी।
जब मन में विश्वास जगा तो लक्ष्य कोई भी दूर नहीं है।
विश्वासी शक्ति हर मन में सदा-सदा भरपूर रही है।
कर सकता मैं सिद्ध लक्ष्य हूँ भाव ये लाना मन में होता।
आत्मविश्वास से ही केवल लक्ष्य सिद्ध जीवन में होता।।२।।
आत्मशक्ति तो हर मानव में ईश्वर ही भरकर देता है।
लेकिन उस शक्ति को मानव सुला स्वयं में ही लेता है।
गुरु रूप में जब कोई आकर उस शक्ति को दिखा जगाता।
तब अपनी ही शक्ति पाकर मानव हृदय में हर्षाता।
फिर तो उसको कर्म कोई भी नहीं कठिन जीवन में होता।
आत्मविश्वास से ही केवल लक्ष्य सिद्ध जीवन में होता॥३।।
जामवन्त ने हनुमान की शक्ति और विश्वास जगाया।
जगा देख विश्वास हनू ने पार सिन्धु करके दिखलाया।
आत्मविश्वास की शक्ति अपनी हमको सदा जगानी होगी।
देख स्वयं की शक्ति फिर तो खुद को ही हैरानी होगी।
जिसमें आत्मविश्वास भरा हो नहीं कभी भी धीरज खोता।
आत्मविश्वास से ही केवल लक्ष्य सिद्ध जीवन में होता॥४।।
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