आँसू की एक बूंद में है गम खुशी संसार सारा।
यह सदा छलकी ही पाई हो विरह या मिलन प्यारा।
बूंद आँसू में छुपी है जगत की शक्ति निराली।
खुशी हो या समय गम का इससे भरती नयन प्याली।
बूंद है शीतल मनोहर बूंद में गर्मी की लाली।
बूंद से हल प्रश्न होते बूंद ही बनती सवाली।
बूंद में है भाव निर्मल नफरती बहती भी धारा।
यह सदा छलकी ही पाई हो विरह या मिलन प्यारा॥१॥
बूंद कोई ऐसी बरसती रोकने से रुक न पाती।
हो गये गर नयन सूने स्वयं ही यह रूठ जाती।
नयन में भण्डार आँसू जो कभी खाली न होता।
दीखती बूंदें मचलती जब कोई हँसता या रोता।
बूंद है मोती अमोली मोल धन दौलत से न्यारा।
यह सदा छलकी ही पाई हो विरह या मिलन प्यारा।।२।।
बूंद जब पलकों में अटकी प्रेम के संग है धड़कती।
कौन है वो जिसकी धड़कन लख इसे न है धड़कती।
बूंद है गंगा के जल सी हर समय पावन रहे है।
नयन का सावन बताओ बूंद के बिन कब बहे है?
डूबते जीवन को आँसू बूंद दिखलाती किनारा।
यह सदा छलकी ही पाई हो विरह या मिलन प्यारा॥३।।
नारी जाति मोल आँसू बूंद का ढंग से समझती।
जब न करती काम युक्ति बूंद आँसू कर गुजरती।
ईश से विनती न दुख की कोई आँसू बूंद बहवे।
नयन में खुशियों के आँसू की केवल बूंद रहवे।
बूंद आँसू मुस्कराये हो कभी नहीं बेसहारा।
यह सदा छलकी ही पाई हो विरह या मिलन प्यारा॥४।।
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