उपभोक्ता हम सब ही नहीं विश्व भर में हर कोई किसी ना किसी रूप में हैं। ऐसे में इस वर्ग की जागरूकता की दिशा में काम करना और इस विषय को समझना और समझाना एक अनिवार्यता हो गया है।
पाठक यह जानें कि विविध वाणिज्यिक गतिविधियों से जुड़े किसी भी देश के सभी नागरिक किसी ना किसी रूप में उपभोक्ता हैं और सभी उपभोक्ताओं के कुछ अधिकार तो कुछ दायित्व भी हैं। उनका यह अधिकार है कि वे किसी भी उत्पाद के उपयोग के माध्यम से उस उत्पाद के गुण-दोषों को समझकर अपनी प्रतिक्रिया दे सकें और संबंधित अधिकारों को जानकर उनका अपने हितों को जानकर उनका उपयोग कर लाभांवित हो सकें। और! उस विषयक विधायी व्यवस्थाओं से भी अवगत हों। हमारे इस प्रयास के लिए हमारे मासिक 'उलझन- सुलझन' स्मरणीय इसलिए है, क्योंकि आज हमारे कुनबे का आकार प्रेरक रूप ग्रहण कर चुका है।
कोरा प्लेटफॉर्म से जुड़े हिंदी भाषा भाषियों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि एक सर्वेक्षण के अनुसार कुल भारतीय उपभोक्ताओं में से तिरानबे प्रतिशत ने समस्याओं के होने के बावजूद भी कभी कोई शिकायत केवल प्रक्रिया जटिल होने की वजह से नहीं कराई जबकि व्यवस्था के अनुसार उपभोक्ता को गुणवत्ता को सुचारु रखने के लिए ऐसी पहल करनी चाहिए।
कुछ ऐसा है जो कोई भी नहीं चाहता लेकिन वह जानना हमारे लिए श्रेयस्कर है। आज तक हमारे कुनबे का सूचकांक। एक हजार पांच सौ तक पहुंच गया है जो सीमित अवधि में संभव हो सका है और हर्ष का विषय है।
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