नयनों की भाषा सरल है और दुनिया में निराली।
इनमें कोमल भावना संग क्रोध की बसती है लाली।
इनमें भावों का खजाना खत्म जो होता नहीं है।
भाव हर पल जागता है वो कभी सोता नहीं है।
नयनों की दृष्टि अनूठी हर तरह का राग इसमें।
स्नेह की गर चाशनी है द्वेष का बैराग इसमें।
तीर इनके हैं नुकीले ये भरे मधुरस की प्याली।
इनमें कोमल भावना संग क्रोध की बसती है लाली।।१।।
नयनों में ममता, ममत्व व प्यार वात्सल्य भरा है।
प्रेम का सन्देश इनमें लाज का सिन्धु खरा है।
पलक है बलवान इतनी जिसको भी चाहे बिठा ले ।
नयन की चितवन है चंचल जिसको भी चाहे रिझा ले।
है अचूकी वार इनका जा नहीं सकता है खाली ।
इनमें कोमल भावना संग क्रोध की बसती है लाली।।२।।
नयन से अंगार बरसे दुलार भी इनसे बरसता।
कोई इनको न सुहाता पर कोई इनको तरसता?
नयन में गम के हैं अश्रु नीर खुशियों का झलकता।
नयन में सन्तोष दिखता और पाई है विकलता।
नयन से हल प्रश्न होते और ये बनते सवाली?
इनमें कोमल भावना संग क्रोध की बसती है लाली।।३।।
नींद नयनों में समाकर मनुज को आराम देती।
रूठ बैठें नयन तो फिर नींद ये कोहराम देती।
नयन की ज्योति से रोशन दीखता संसार सारा।
नयन में ही है समाया जगत भर का प्यार सारा।
नयन बिन सूना सभी है पर्व ये होली दिवाली।
इनमें कोमल भावना संग क्रोध की बसती है लाली।।४।।
कृष्णदत्त शर्मा कृष्ण
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