"Success in not measured by how much you have, but how much you have given."
इस कथन को चरितार्थ किया है एक विद्यालय नारायण विद्यापीठ ने। इस विद्यालय की स्थापना के दस वर्षों का सफर पूरा करने पर विद्यालय ने अपने विद्यार्थियों के माध्यम से वार्षिकोत्सव के रूप में जो प्रदर्शन किया वह विस्मित कर देने वाला था। ग्रामीण अंचल की उनके विद्यालय में पढ़ी एक छात्रा स्वाति ने जनपद की मैपल एकाडेमी को कक्षा बारह में टॉप करके यह दर्शा दिया कि अध्ययन के मामले में पूर्व विद्यालय के द्वारा उसकी जड़ें कितनी मजबूत कर दी गई हैं। नारायण विद्यापीठ के वार्षिकोत्सव में विशिष्ट अतिथि लेखक डॉ. महिपाल रहे, जो इंडियन इकोनॉमिक सर्विस से सेवानिवृत्त होने के उपरांत आज एक ख्याति प्राप्त लेखक के रूप में समाज में अपना स्थान बना चुके हैं और समाज में जनजागृति के साथ-साथ ऑर्गेनिक कृषि तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम से अभिभूत विशिष्ट अतिथि ने बालकों के मानसिक और शैक्षणिक विकास में योगदान करने के ध्येय से अपनी ओर से मदद करने की घोषणा भी मंच से की। कुल मिलाकर इस सबके मूल में उपरोक्त वाक्य रहा और कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले समस्त लोगों ने अपने अपने स्तर से भरपूर योगदान दिया।
साथियो! किसी किसी कार्यक्रम के अन्तर्गत ही ऐसे दुर्लभ अवसर आते हैं जब उपस्थित अतिथि कार्यक्रम की प्रस्तुतियों को देख अभिभूत और भावविभोर हो उठे और इतना कि स्वमेव वीडियोग्राफी में संलग्न हो जाए तो सिर्फ इसलिए कि प्रस्तुति मन को भायी और उन प्रस्तुतियों को कुझेक और बच्चों के समक्ष प्रस्तुत कर उनको प्रेरित करने का प्रयास किया जाए। ऐसा ही कुछ हुआ नारायण विद्यापीठ के वार्षिकोत्सव के दौरान जब केन्द्रीय शासन के एक सेवानिवृत्त उच्चाधिकारी डॉ० महिपाल ने बच्चों के किंकर्तव्यविमूढ़ कर देने वाले प्रदर्शन की स्वयं वीडियोग्राफी करने के ध्येय से एक रकम स्कूल को देने का प्रस्ताव सहर्ष रख दिया। कार्यक्रम में इतना मौलिक और हतप्रभ कर देने वाला वातावरण प्रस्तुतियों से बन गया था। इतना अधिक कि इसको शब्दों में बांधकर प्रस्तुत किया जा सकना संभव नहीं।
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