हे प्रभु, आनन्ददाता कर रहा मैं याचना।
मैं निबल हूँ कृपा करके हाथ मेरा थामना।
भजन पूजन और वन्दन मैं न कुछ भी जानता।
मात्र तेरा नाम लेना मैं तो पूजा मानता। नाम से उद्धार हो बस पूरी करना कामना।
मैं निबल हूँ कृपा करके हाथ मेरा थामना ।।१।।
भाव हृदय में भरे हैं नीर नयनों में भरे।
लग रहा है कर्म अच्छा कोई न अब तक करा।
ले मुझे अपनी शरण में इतना कहना मानना।
मैं निबल हूँ कृपा करके हाथ मेरा थामना ।।२।।
तुम दयालु दीनबन्धु हर दु:खी के साथ हो।
बिन तुम्हारे कौन जग में तुम ही सबके नाथ हो।
दो मुझे वर हो कभी ना अब दु:खों से सामना।
मैं निबल हूँ कृपा करके हाथ मेरा थामना ।।३।।
मेरा तन मन अब न भटके ऐसा दे दो पथ मुझे।
जहाँ न हो ईश चर्चा पथ वो देना मत मुझे।
पथ जो पहुँचे नाथ तुम तक वो मुझे है जानना।
मैं निबल हूँ कृपा करके हाथ मेरा थामना।।४।।
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