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अध्ययन की महत्ता को भी जानें

आप स्कूल में हों या कॉलेज में अथवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की प्रक्रिया में, पढ़ाई से नहीं बच सकते। वर्तमान में पुस्तकों के साथ की गई मेहनत आपके भविष्य को मनचाहा आकार दे सकती है, लेकिन, दिक्कत यह है कि अध्ययन में मन नहीं लगता। ऐसे में आपको इसकी वजह तलाशनी चाहिए। खुद से पूछना  चाहिए कि आपके अध्ययन का उद्देश्य क्या है? दरअसल पढ़ना एक कला है, जिससे आपका समग्र विकास होता है और व्यवस्थित तरीके से की गई पढ़ाई आपके लिए कॅरिअर के तमाम अवसरों का सृजन करती है। लेकिन, समस्या उत्पन्न होती है कि पढ़ने का सही तरीका मालूम न होने के कारण। एक प्रयोग करके देखें कि जब भी आप किसी पुस्तक को पढ़ें, तो उसे पूरी मानसिक ऊर्जा और फोकस के साथ पढ़ें। अगर आप बगैर किसी योजना के पढ़ाई कर रहे हैं, तो आप निश्चित ही थक जाएंगे। आप यदि एकाग्रचित्त होकर पढ़ रहे हैं, उसमें अगर आनंद आ रहा है, तो आप ना तो कभी बोर होंगे और ना ही वह पढ़ाई व्यर्थ जाएगी। पुस्तकों का सम्मान करें और जब भी उन्हें उठाएं पूरी एकाग्रता से उन्हें आत्मसात करने की कोशिश करें। कोशिश करें कि आपके पास तरह-तरह के विषयों की पुस्तकें हों। इसका लाभ यह होगा कि जब भी आप अपनी स्कूली या कॉलेज की पढ़ाई से ऊबने लगेंगे, तब ही आप अपने पसंदीदा विषय की पुस्तक का अध्ययन कर उस  ऊब  से बाहर आ सकते है और यदि आप अपने विषय को पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ना चाहते हैं, तो उसके लिए किसी तरह की भौतिक तैयारी की आवश्यकता नहीं होगी। इस हेतु आपको सिर्फ मानसिक रूप से तैयार होना होता है। एक आराम कुर्सी और बिल्कुल शांत जगह इसकी आवश्यकता है। अपनी शख्सियत को ऐसा बनाएं, जो कैसे भी वातावरण में खुद को एकाग्र रख सके।

फोन या कंप्यूटर अथवा टेबलेट से पढ़ने के बजाय पुस्तकों को प्राथमिकता दें। पुस्तक से पढ़ने का एक लाभ यह भी होगा कि आपको स्क्रीन टाइम से एक अच्छा ब्रेक मिल जाएगा। जब कोई एकदम नई पुस्तक आपके हाथ आती है, तो उसके पेज छूने में कैसे लगते हैं, या नई पुस्तक के पन्नों से एक खास गंध आती है। क्या मोबाइल व टेबलेट आपको यह अनुभव दे सकते हैं ?

कई बार पढ़ते वक्त लोग पढ़ने में इतना मशगूल हो जाते हैं कि शब्दों पर ध्यान नहीं दे पाते। जब भी आपको ऐसा लगे, तो तुरंत अपने मन को एकाग्र करने की कोशिश करें। किताबों में एकदम नए शब्द मिल जाते हैं, तो उन्हें नोट करते चलें। हर लेखक का वाक्य की रचना का ढंग अलग-अलग होता है, उसे भी समझने की कोशिश करें।

डेविड जेलेस (गूगल अनुवादित), न्यूयॉर्क टाइम्स

(दैनिक अमर उजाला से साभार)


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