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मेंटोर श्री नारायण के शैक्षणिक प्रयास

 "नारायण विद्यापीठ, मंडौरा, मेरठ का शैक्षणिक और ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर का दौरा।"

नारायण विद्यापीठ, मंडौरा मेरठ के बच्चों और शिक्षकों ने ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर का भ्रमण 5 नवम्बर को किया. इस शैक्षणिक दौरे पर बच्चों ने न केवल विद्यालय से बाहर के वातावरण का आनंद उठाया बल्कि हस्तिनापुर जैसे ऐतिहासिक स्थल की प्राकृतिक छटाओं को निहारा। हस्तिनापुर में पांडवों का किला जो आज एक टीला मात्र है उसका भ्रमण किया। हस्तिनापुर में सरकार द्वारा पुरातत्व विभाग से कराई जा रही खोज के कारण पूरे टीले को ऊपर तक नहीं देख पाए, लेकिन जहाँ तक संभव था उसको देखकर इतिहास के संस्मरण में खोये बच्चों ने सवालों की झड़ी लगा दी। शिक्षकों ने यथासंभव उत्तर देकर बच्चों की ज्ञान क्षुधा को शांत किया। 

पांडवों के प्राचीन किले की दीवार को देखकर बच्चे अभिभूत हो गए। किले के बराबर में प्राचीन कुँए का निरीक्षण किया और उसके प्राचीन इतिहास के अहसासों में तल्लीन छात्र-छात्राएं छोटी-छोटी बातें पूछकर महाभारत काल में खो गए। यह एक अविस्मरणीय क्षण था। बच्चों के जीवन में एक अहम् पायदान और अपने प्राचीन इतिहास से एक तरह का परिचय कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। 

शिक्षकगण अपने छात्र-छात्राओं को ज्ञानार्जन करते देखकर हस्तिनापुर, महाभारत और प्राचीन भारत के इतिहास के पन्नों में लगभग खो गए। विद्यालय वापस आकर भी बच्चे दो दिनों तक उन यादों को ताज़ा किये हुए हैं। जो बच्चे हस्तिनापुर दौरे पर नहीं जा सके वे बच्चे अगले ऐतिहासिक और शैक्षणिक दौरे की प्रतीक्षा में हैं। यह दौरा एक युग में भ्रमण के समान रहा। शिक्षकों में मेजर नारायण सिंह, कुमारी स्वीटी गौतम, आँचल गौतम, जेन्स गौतम और पिंकी ने इस दौरे को सफलतापूर्वक पूर्ण किया। विद्यालय के प्रशासनिक स्टाफ में श्री परमाल राणा और अंकुर विकल ने इस दौरे को सफल बनाने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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