ज्ञान के दीये जलाओ, जग में उजियारा हो जाएगा।
जहां फैलेगा प्रकाश ज्ञान का, अंधियारा छंट जाएगा।।
ज्ञान के दीये जलाओ--------
युग बीता दीये जलाते, किन्तु,दीये के तले अन्धेरा है।
अन्धकार भरा दिमागों में, और ज्ञान का दूर सवेरा है।।
जाले मस्तिष्क के दूर करो, जगत रंगोली बन जाएगा।।।
ज्ञान के दीये जलाओ-------
उपहार बांटते फिरे उन्हें, मतलब जिनसे तेरा-मेरा है।
कुछ कद्र करो उन रिश्तों की, हमने ही जिन्हें बिखेरा है।।
रिश्तों के सिमटने पर, स्वर्ग हर एक घर बन जाएगा।।।
ज्ञान के दीये जलाओ---------
दीवाली की खुशियों पर तो, पानी प्रदूषण ने फेरा है।
और मिठास पर उसकी, पडा मिलावट का डेरा है।।
बिन मिष्ठान पटाखों के, कब अर्थ पर्व का रह जाएगा।।।
ज्ञान के दीये जलाओ---------
रोशन कर दो वो बस्ती, जहां शिक्षा का न बसेरा है।
ज्ञान से प्रकाशित होने पर, विकसित देश ये मेरा है।।
सबको मंगल ज्ञान मिले, जग मंगलमय हो जाएगा।।।
ज्ञान के दीये जलाओ---------
रमन "सिसौनवी"
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