जय-जय खाटू श्याम तुम्हारे चरण में शत बार नमन।
सदा तुम्हारी कृपा करती भक्तों की हर पीर हरण |
भगवान कृष्ण से तुमको पूरा गौरव और सम्मान मिला।
भरी अलौकिक शक्ति तुममें एक अनुपम स्थान मिला।
आज तुम्हारे जन-जन द्वारा पूजे जाते सदा चरण।
सदा तुम्हारी कृपा करती भक्तों की हर पीर हरण।।१।।
हर हारे के साथ दिखे तुम देते उसे सहारा हो।
ऐसा लगता हर हारे को तुम्हीं विजय का द्वारा हो।
तुमने उसको कंठ लगाया जो श्रद्धा से हुआ शरण।
सदा तुम्हारी कृपा करती भक्तों की हर पीर हरण॥२।।
मात्र तुम्हारी दृष्टि से ही सदा पराजय जीत बनी।
नहीं ठिकाना उसको मिलता जिस पर भी हैं भौंहें तनीं।
तुम्हें समर्पित भक्त सदा ही करता पाया धर्म वरण।
सदा तुम्हारी कृपा करती भक्तों की हर पीर हरण॥३।।
जहाँ भी मन्दिर बने तुम्हारे पावनता बिखरी पाई।
भक्तों की मन मैली चादर कृपा से निखरी पाई।
नाथ मेरे दूषित भावों का कर दिखलाओ शीघ्र क्षरण।
सदा तुम्हारी कृपा करती भक्तों को हर पीर हरण॥४।।
कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण'
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