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एक आयोजन की समग्र संकल्पना (विविध आयोजनों के लिए उत्सुक रहने वाली प्रतिभाओं की सहायतार्थ)

यह आव्हान था -

साथियो, जीवन और मानव संसाधनों को समझना और जानना ज़रूरी और अभियान है अनुभवों से समृद्धि। 

समझिए कि दुनिया उज्ज्वल रंगों के एक बगीचे के जैसी है! यहां हर मानव संपदा है उपयोगी।

अनुभवों से समृद्धि

यह निमंत्रण बनाया -

Sethpal Ji (Padmshree), Vipin Ji (Educationist), Bijendra Ji (Airforce) & Rakesh Ji (Asstt. Pro.) are coming to share 

EXPERIENCES CAN PROSPER

Scheduled at

03 Oct. 2023 8AM-12AM 

Come to learn.

Rashtriya Inter College and Narayan Vidyapeeth

Noor nagar, Lisadi Road, Meerut. 

RSVP: +919412663516,

आशीर्वचन तैयार कराया, जो ये था

श्री सेठपाल सिंह, श्री विपिन परमार, श्री बिजेन्द्र सिंह (एयरफोर्स) एवं श्री डॉक्टर राकेश राणा को व्यक्तिगत रूप से संबोधित।

आशीर्वचन

तुमको है आशीष हृदय से गौरव - मान सदा ही पाओ, 

अपने  सद्कर्मों से जग में हर्षित हो सबको हरषाओ।। 

जीवन  तो एक कर्म क्षेत्र है, कर्म सदा ही करना होगा, 

जो  भी  जैसा  कर्म करेगा, उसका वैसा भरना होगा।। 

तुमने अपनी निष्ठा से ही खुद को आगे बढ़ते पाया, 

दुनिया का कोई भी अवरोध नहीं तुम्हारे आड़े आया।। 

जीवन-पथ पर सदा सुगन्धित सुमनों से तुम महके पाओ, 

कंटक पथ के चुन-चुन पथ को जग के हेतु सुगम बनाओ।। 

जो भी हों अभिलाषा मन की, ईश्वर उनको पूर्ण करेगा,

करो भलाई दूजों की बस, हर संकट को ईश हरेगा।।

शुभाकांक्षी

कृष्णदत्त शर्मा कृष्ण

(उलझन - सुलझन के लिए राजीव, संजीव एवं मेजर नारायण के भावों के अनुसार)

प्रेस कांफ्रेंस हेतु

शिक्षा के साथ जुड़ने पर अनुभव समृद्धि की ओर ले जा सकते हैं और असीमित समृद्धि की ओर। इस तथ्य को दृष्टिगत रखकर जनपद में नूरनगर लिसाड़ी रोड स्थित शिक्षण संस्था राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में तथा जनपद के ग्राम मंडौरा स्थित नारायण विद्यापीठ में दिनांक 3 अक्तूबर को प्रातःकालीन सत्र में 'अनुभवों से समृद्धि' विषय पर विद्यार्थियों के लिए एक व्याख्यानमाला आयोजित की जा रही है। इस व्याख्यानमाला में वर्ष 2022 में पद्मश्री सम्मान से विभूषित सेठपाल सिंह, कृषि शिक्षाविद् विपिन परमार, वायुसेना के सेवानिवृत्त और विश्व की एक अग्रणी कंपनी में सेवारत रहे बिजेंद्र जी तथा शिक्षाशास्त्री डॉक्टर राजेश राणा अपने विचार व्यक्त करेंगे। ये सभी अतिथिगण अपने अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं और सेठपाल जी तो सम्मान से विभूषित होने के उपरांत से निरंतर शासकीय कार्यक्रमों से जुड़कर अनुभवों से अत्यंत समृद्ध हो चुके हैं मसलन वे दो बार लाबासा मसूरी स्थित आई ए एस प्रशिक्षण अकादमी में आमंत्रित किए जा चुके हैं और भावी अधिकारियों के साथ विचार विनिमय कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त लोकसभा में इस वर्ष 26 जनवरी को समस्त सांसदों से तथा गत माह उनके आवास पर पधारे इसरो के लगभग डेढ़ दर्जन कार्मिकों के साथ विचार विनिमय कर चुके हैं। ध्यान रखिए कि जीवन के सबक और औपचारिक शिक्षा से सीखना सफलता के द्वार खोल सकता है। इसको ध्यान में रखकर इस व्याख्यानमाला को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जा रहा है जिससे बालकों को अपने लक्ष्यों का निर्धारण करने में मदद मिले।

अतिथियों का प्रोग्राम में प्रस्तुत परिचय

बालको!

आपको यह जानकर हर्ष होगा कि आज हमारे विद्यालय में कुछ ऐसी प्रतिभाएं पधार रही हैं जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में ख्याति अर्जित करके समाज में अपना स्थान बनाया है। आपको अपने भविष्य का निर्माण यदि एक उदाहरण के रूप में करना है तो यह जानना होगा कि शिक्षा के साथ जुड़ने पर अनुभव समृद्धि की ओर ले जा सकते हैं और असीमित समृद्धि की ओर। इसको दृष्टिगत रखकर ही हमारे विद्यालय में आज 'अनुभवों से समृद्धि' विषय पर विद्यार्थियों के लिए एक व्याख्यानमाला आयोजित की जा रही है। इस व्याख्यानमाला में वर्ष 2022 में पद्मश्री सम्मान से विभूषित सेठपाल सिंह, कृषि शिक्षाविद् विपिन परमार, वायुसेना के सेवानिवृत्त और विश्व की एक अग्रणी कंपनी में सेवारत रहे बिजेंद्र जी तथा समाजशास्त्री डॉक्टर राजेश राणा अपने अनुभव हमारे साथ साझा करने के लिए पधार रहे हैं। ये सभी अतिथिगण अपने अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं और सेठपाल जी तो सम्मान से विभूषित होने के उपरांत से निरंतर शासकीय कार्यक्रमों से जुड़कर अनुभवों से अत्यंत समृद्ध हो चुके हैं मसलन वे दो बार लाबासा मसूरी स्थित आई ए एस प्रशिक्षण अकादमी में आमंत्रित किए जा चुके हैं और भावी अधिकारियों के साथ विचार विनिमय कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त लोकसभा में इस वर्ष 26 जनवरी को समस्त सांसदों से तथा गत माह उनके आवास पर पधारे इसरो के लगभग डेढ़ दर्जन कार्मिकों के साथ विचार विनिमय कर चुके हैं। ये सहारनपुर से हैं और कृषि संबंधी गतिविधियों में निरंतर बदलाव कर उन्होंने न केवल उपलब्धियां अर्जित की हैं बल्कि सामान्य कृषकों से कहीं अधिक आय भी अर्जित की है।

श्री विनय परमार जी पूसा कृषि संस्थान में कार्यरत रहे हैं और वो भी सहारनपुर से ही हैं। पूसा कृषि संस्थान से वी आर एस लेकर वर्तमान में अपने निजी प्रयासों में व्यस्त हैं। 

श्री बिजेंद्र जी नोएडा से हैं और वायुसेना से सेवानिवृत्त होकर वर्षों तक वे एक जर्मनी की कंपनी में कार्यरत रहे और अपने अनुभवों से उसको समृद्ध किया।

डॉक्टर राकेश राणा समाजशास्त्री हैं और मुजफ्फरनगर से हैं। उनकी शिक्षा दीक्षा मेरठ विश्वविद्यालय से ही हुई है और वे आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जानेमाने एम एम एच कॉलेज गाजियाबाद में समाजशास्त्र विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। अपने शिक्षण काल में उन्होंने समाज को जांचा और परखा है। वे आज के सबसे व्यस्त शिक्षकों में यदि शुमार किए जा सकते हैं तो शिक्षा के प्रति अपने समर्पण के कारण। अपने शिक्षण कैरियर में वे अनगिनत सेमिनारों में विविध रूपों में अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

ध्यान रखिए कि जीवन के सबक और औपचारिक शिक्षा से सीखना सफलता के द्वार खोल सकता है। इसको ध्यान में रखकर इस व्याख्यानमाला को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जा रहा है जिससे बालकों को अपने लक्ष्यों का निर्धारण करने में मदद मिले और विद्यालय ऐसे अनेकानेक बालक तैयार करता रहे जो वैश्विक पटल पर अपने आप को अपने स्तर से स्वावलंबी होकर सफलता प्राप्त करने में सक्षम हो सकें।

प्रेस नोट

यह हर्ष का विषय है कि राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में आज ऐसी प्रतिभाएं हमारे मध्य हैं जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में प्रतिमान स्थापित कर ख्याति अर्जित करके समाज में अपना स्थान बनाया है। आपको यदि अपने भविष्य का निर्माण एक उदाहरण के रूप में करना है तो यह जानना होगा कि शिक्षा के साथ जुड़ने पर अनुभव समृद्धि की ओर ले जा सकते हैं और असीमित समृद्धि की ओर। इसी को दृष्टिगत रखकर राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के प्रबंध तंत्र ने 'अनुभवों से समृद्धि' विषय पर विद्यार्थियों के लिए एक व्याख्यानमाला आयोजित करने का निर्णय लिया। हमारा सौभाग्य है कि हमको अतिथियों की सहमति भी मिल गई। कार्यक्रम के आरंभ में समस्त अतिथियों का परिचय संस्था के प्राचार्य संजीव कुमार नागर के द्वारा दिया गया। उसके उपरांत उनका स्वागत किया गया।

व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता वर्ष 2022 में पद्मश्री सम्मान से विभूषित सेठपाल सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह एक दुर्लभ अवसर है जब हम परस्पर बातचीत कर पा रहे हैं। शायद कुदरत ही आपको और हमको मिलाकर और विचारों को साझा करवाकर कुछ विशेष श्रेणी का करने कराने की आकांक्षी है। बालकों मैंने कृषि क्षेत्र में जो भी कुछ सीखा और किया उसके पीछे प्रेरणा मेरे बुजुर्ग थे, जो निरंतर पास बैठकर आत्मविश्वास बढ़ाते हुए नया करते रहने की प्रेरणा देते थे। जीवन में प्रत्येक क्षेत्र में प्रयोग हमको न केवल सिखाते हैं बल्कि सुधार करने की क्षमता भी देते हैं। मैंने अभी तक जो भी किया उसमें पुरस्कार पाने की लालसा न होकर कृषि गतिविधि में सफलता प्राप्त करना उद्देश्य होता था। पुरस्कार के रूप में तो मुझको लगता है कि मेरे निरंतर प्रयासों को प्रभु ने मान दिलाया। पद्मश्री पुरस्कार को प्राप्त करने के उपरांत शासकीय कार्यक्रमों में मेरा समय ज्यादा व्यतीत हुआ है, लेकिन उन सबने मुझको सीखने और समझने का पर्याप्त अवसर दिया है। तो आप लोग यह गांठ बांध लो कि अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेना है और उसमें प्रयोग कर अधिकाधिक सीखना है। बस यही आपकी और शिक्षण संस्थान की सफलता का मार्ग प्रशस्त कर देगा। मैं इस कार्यक्रम के आयोजकों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।

इस अवसर पर बायोटेक्नोलॉजी में डॉक्टरेट श्री विपिन परमार ने पूसा कृषि संस्थान के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जीवन में शिक्षण संस्थान प्रमुख भूमिका निभाते हैं। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझको अपना भविष्य बनाने के लिए ऐसा अद्वितीय शिक्षण संस्थान मिला जहां पर विविध किस्म की गतिविधियां निरंतर चलती थीं और सिखाती थीं।

नोएडा से पधारे श्री बिजेंद्र जी वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए और फिर अपनी काबिलियत से जर्मनी की एक कंपनी में कार्यरत रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मेरा सौभाग्य था कि मेरे पूर्वज शिक्षित थे तो वो मुझको जीवन में शिक्षा की भूमिका को समझा पाए। मैंने गंभीरतापूर्वक शिक्षा अर्जित की और एक मुकाम समाज में हासिल कर पाया। शिक्षा के प्रति समर्पित भाव ही ने जीवन सुगम किया मेरी अगली पीढ़ी के रूप में मेरे बच्चे को करियर निर्माण में सहायता की। यद्यपि वह आज हमारे बीच नहीं है। शिक्षा और जिज्ञासा ही सफलता के मार्ग को प्रशस्त करते हैं।

समाजशास्त्री डॉक्टर राकेश राणा अपने विद्यालय में प्रधानाचार्य जी की अनुपस्थिति और प्रवेशों में व्यस्तता के कारण कार्यक्रम में उपस्थित न हो सके लेकिन  उन्होंने अपने प्रेषित संबोधन में कहा कि जीवन में अनुभव सदैव जीवन को गुनने में प्रमुख भूमिका का निर्वहन करते हैं। मुझको विविध प्रकृति के कार्यक्रमों में सम्मिलित होने का अवसर मिलता है तो व्यवहार और चीजों को समझने का भी अवसर मिलता है। अनुभव जीवन में समृद्धि की सीढ़ी है। शिक्षा और जिज्ञासा इसके प्रभाव को द्विगुणित कर देते हैं।

उपरोक्त कार्यक्रम के अनुक्रम में ही नारायण विद्यापीठ, मण्डौरा, मेरठ, में भी इन्हीं अतिथियों को जाना था, लेकिन प्रथम कार्यक्रम ही में विलंब हो जाने के कारण इन अतिथियों का प्रोग्राम तो स्थगित कर दिया गया लेकिन एक अन्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया! 'अनुभव से सीख' शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों ने प्रतिभाग किया। विद्यालय के छात्र-छात्राएं अतिथियों के विचार श्रवण के लिए अत्यन्त उत्सुक दिखे। इन अतिथियों में मुख्य थे श्री पंकज सिंह जी, (आई.टी. एक्सपर्ट और प्रोग्रामर) तथा श्री वेदव्रत आर्य जी (समाजसेवी व राजनीतिक चेतना प्रेरक)।

अतिथि श्री वेदव्रत आर्य जी ने छात्रों को अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि कोई विषय या कोई काम अच्छा या बुरा अथवा छोटा या बड़ा नहीं होता। जो कुछ भी हम करें- उसमें कुशलता प्राप्त करना मुख्य बात है।

आई.टी. एक्सपर्ट और प्रोग्रामर श्री पंकज सिंह जी ने जोर देते हुए कुछ कि अपने जीवन लक्ष्यों पर पूरा ध्यान दें, लेकिन ख्याल रहे कि हम किसी के लिए भी किसी भी रूप में बाधा न बनें। अपने सत्मार्ग को प्रशस्त करें और उस पर द्रुत गति से चलें। कर्म प्रधान ही हमारा धर्म हो। कर्म ही सब कुछ है। 

प्रधानाचार्य और कार्यक्रम के अध्यक्ष मेजर नारायण ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और बच्चों को गीता के अध्याय आठ में संकलित ज्ञान योग के बारे में बताया।

१९ अक्टूबर २०२३

हमारा मानना है कि पद्मश्री सेठपाल जैसा विषय विशेषज्ञ तथा गुणवान व प्रतिष्ठित व्यक्ति अपने कार्यों, शब्दों और नेतृत्व गुणों के माध्यम से दूसरों को प्रेरित कर सकता है। यही कारण था कि अपने पूर्व प्रयास में दो शिक्षण संस्थानों के लिए निर्धारित कार्यक्रमों में से समय अभाव के कारण दूसरे में पहुंच पाना उनके लिए संभव न हो सका था। क्योंकि गणमान्य व्यक्ति स्वविकसित मूल्यों, सिद्धांतों और व्यवहार को अपनाकर दूसरों को पर्याप्त प्रेरित भी कर सकते हैं और उन सबको वे दूसरों में देखना चाहते हैं। अतः मेरठ में उनके एक शासकीय कार्यक्रम में सम्मिलित होने की जानकारी होने पर उनका एक समामेलन कार्यक्रम नारायण विद्यापीठ में नौ बजे रखवाया गया।

हमारा मानना है कि गणमान्य व्यक्ति व्यक्तियों और समुदायों को उनकी पूरी क्षमता हासिल करने में मदद करने के लिए अवसर, संसाधन और सहायता प्रदान करके उनको और सशक्त बना सकते हैं। अपने प्रभाव का उपयोग करके, गणमान्य व्यक्ति सकारात्मक सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तनों की वकालत कर सकते हैं, दूसरों को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। गणमान्य व्यक्ति शिक्षा और परामर्श कार्यक्रमों का समर्थन करके प्रेरित कर सकते हैं जो लोगों को कौशल विकसित करने और उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद करते हैं। दरअसल गणमान्य व्यक्तियों के पास दूसरों को प्रेरित करने के लिए एक अनूठा मंच होता है, और उनके कार्यों और विकल्पों का व्यक्तियों, समुदायों और यहां तक कि राष्ट्रों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। यह नेतृत्व, सहानुभूति, दूरदर्शिता और सकारात्मक प्रभाव का संयोजन है जो गणमान्य व्यक्तियों को प्रेरणा का स्रोत बनने में सक्षम बनाता है। और! संयोग ऐसा बना कि स्वागत कार्यक्रम में पद्मश्री सेठपाल के साथ साथ कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गन्ना उपज लेने वाले कृषक वेदव्रत और कल के सैन्य अधिकारी और आज के शिक्षाविद् मेजर नारायण भी उपस्थित रहे।

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