दूरदर्शन के 64वें स्थापना दिवस के अवसर पर इस दिवस को एक पर्व के रूप में मनाया गया तो इसको अनंत ऊँचाइयों पर पहुँचाने वाली विभिन्न विभागों से संबद्ध प्रतिभाओं को भी इस अवसर पर आमंत्रित किया गया। वर्ष 1959 में जब यह आरंभ हुआ था, तो सीमित अवधि के नियमित कार्यक्रमों ने दर्शक वर्ग को सीमित करके रख दिया था। दूरदर्शन के विविध प्रसारणों के मध्य कृषि दर्शन 26 जनवरी, 1969 को आरंभ हुआ। कृषि दर्शन कार्यक्रम दूरदर्शन के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ। किसान भाइयों को राम राम से भारत में प्रारंभ होने वाले इस कार्यक्रम ने देश में वृद्धि क्षेत्र की प्रभावी वृद्धि में विशेष भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम के प्रसारण में प्रमुख भूमिका का निर्वहन करने वाले चौ० रघुनाथ सिंह इस कार्यक्रम के प्रसारण में व्यापक भूमिका निभा चुके हैं और जब उन्होंने इसका खाका खींचा तो इसके प्रसारण में होने वाले व्यय की पूर्ति विज्ञापनों से कर और भी उपयोगी कर दिया था। इस कार्यक्रम को दूरदर्शन के दृष्टिकोण से अनंत ऊंचाइयों पर पहुंचने वाले चौ. रघुनाथ सिंह इस वीडियो में जगह-जगह दिख सकते हैं और यदि उपस्थित मेहमानों में वे सबसे वरिष्ठ पाए जाएं तो तनिक सा भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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