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जीवन का ककहरा

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

जागरण संवाददाता, सहारनपुर: विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए रूबी देवी ने स्वयं अपनी पहचान बनाई है। महिला समूह की सक्रिय सदस्य के रूप में उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया और स्वयं रूबी देवी ने सहायता समूह से जुड़कर घरेलू उत्पादों का निर्माण शुरू किया। वह अब अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उन्हें स्वावलंबी बनाने में जुटी है। विकासखंड नकुड़ के गांव लुंढी निवासी रूबी देवी समूह की सदस्य के रूप में आत्मनिर्भर बनने की ठानी और अपना स्वरोजगार आरंभ किया। आर्थिक स्थिति बेहतर न होने से शिक्षा अधूरी रह गई और कक्षा-8 तक ही पढ़ाई हो सकी। पति मजदूरी करते थे और घर का गुजारा बड़ी मुश्किल से हो पता था। घर में तीन बच्चों का परिवार था, जिनकी शिक्षा और परवरिश की चिंता इन्हें सताती रहती थी, परंतु मन में इच्छा थी खुद का रोजगार करने की। इस सपने ने इनको प्रेरित किया। लगभग तीन साल पहले इन्होंने स्वयं सहायता समूह की तरफ रुख किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्टाफ द्वारा भरपूर सहयोग मिला और मेहनत करते हुए अपने गांव में समूह सखी चयनित हुई और महिलाओं के आर्थिक विकास के लिए प्रयास किया।

पीएनबी आरसेटी प्रशिक्षण- एक दिन उनके गांव में और आरसेटी द्वारा प्रशिक्षण जागरूकता कैंप लगाया गया, जिससे मिली प्रेरणा से व्यवसाय का हुनर सीखने के लिए रूबी देवी ने दस दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया और व्यापार प्रबंधन के गुर सीखे। प्रशिक्षण के दौरान प्रेरित होकर इन्होंने विभिन्न घरेलू उत्पादों; आचार, पापड़, मसाला बनाना, झाड़ू निर्माण, फिनायल आदि; का निर्माण शुरू किया। स्वयं के साथ-साथ समूह की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया। रूबी देवी ने खुद का स्वरोजगार स्थापित करने के साथ ही महिलाओं को अपने यहां रोजगार का प्रशिक्षण देकर कार्य को आगे बढ़ाया। अपने क्षेत्र की पंद्रह महिलाओं को प्रशिक्षण हेतु आरसेटी में भेजा।

दृढ़ता की 'कविता' गुनगुनाकर बन गईं सफल उद्यमी

जागरण संवाददाता, सहारनपुर: मन में आगे बढ़ने की ललक और दृढ़निश्चय से आगे बढ़ते हुए कविता ने सफल उद्यमी बनने तक का सफर तय किया है। यह सफलता उन्हें रातोंरात नहीं मिली। चुनौतियों का मुकाबला करते हुए विपरीत परिस्थिति में भी उन्होंने हौसला नहीं खोया। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण कविता ने स्वरोजगार शुरू कर अन्य महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का काम करना तय किया।

विकासखंड रामपुर मनिहारान के गांव उमाही कलां की कविता देवी ने गरीबी की विकट स्थिति में भी आगे बढ़ने का हौसला कायम रखा। उनकी स्कूली शिक्षा केवल आठवीं तक हो पाई।

वर्ष 2019 से पहले उनके पति दिल्ली में वाहन चलाते थे। स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के कारण उन्हें यह कार्य छोड़ देना पड़ा और फिर वह गांव लौट आए। तीन बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की जिम्मेदारी कविता को ही उठानी पड़ी। ऐसे में रोजगार का कोई साधन नजर नहीं आ रहा था। तब कविता देवी ने ठान लिया कि वह अब स्वयं का काम शुरू करेंगी। कविता को एक सहेली से पता चला कि रोजगार की कई योजनाएं ब्लाक कार्यालय से संचालित होती हैं। वर्ष 2019 में ब्लाक में लगे कृषि मेले में पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के बारे में जानकारी मिली और इन्होंने प्रशिक्षण लेना तय किया ।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा गठित स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कविता ने स्वयं सहायता समूह बनाया और आरसेटी से प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें व्यवसाय प्रबंधन, गुणवत्ता प्रबंधन और घरेलू उत्पादों जैसे अचार- मसाला बनाने का प्रशिक्षण लिया। इनका रुझान मसाला निर्माण की ओर बढ़ा। केवल 900 रुपये से कार्य शुरू करने वाली कविता के व्यवसाय का सालाना टर्नओवर लगभग 35 लाख रुपये है। केडी मसाले फर्म के अंतर्गत सभी प्रकार के मसाले तैयार किए जाते हैं। गांव के साथ-साथ जिले के आसपास के क्षेत्र में भी इनके मसाले की आपूर्ति होती है।

पिछले दो वर्ष से कविता द्वारा नाबार्ड एवं एनआरएलएम के सहयोग से नोएडा, मुजफ्फरनगर, मेरठ एवं सहारनपुर में अलग-अलग मंचों, आरसेटी बाजार के माध्यम से स्टाल लगाने का मौका मिला और अच्छी आमदनी हुई।

आरसेटी के कार्यक्रम संयोजक अमित कुमार चौबे ने बताया के स्वरोजगार से कविता के घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। दस से अधिक महिलाओं और पुरुषों को रोजगार से जोड़ा है।

समूह की महिलाओं को रीना ने आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया

जासं, सहारनपुर: स्वरोजगार के लिए अथक संघर्ष करते हुए रीना देवी ने अपना मुकाम बनाया वह स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनीं। सिलाई एवं ब्यूटी पार्लर का कार्य सीखा घर पर ही कपडे सिलने का कार्य शुरू किया। प्रशिक्षण भी लिया वह समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें रोजगार से जोड़ने में लगी हैं।

विकासखंड पुंवारका के ग्राम पंचायत गागलहेड़ी की रीना देवी आज स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। गागलहेड़ी में रीना ने अपना बुटीक एवं पार्लर खोला। स्वयं का रोजगार करने के लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा प्राप्त सुविधाओं का लाभ उठाया। ठाकुरजी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाओं को आत्मनिर्भरता की  ओर प्रेरित किया।

बहन अनिता ने आरसेटी प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वरोजगार शुरू किया। रीना ने पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से उद्यमिता विकास प्रशिक्षण लिया रीना के निर्मित रेडीमेड कपड़ों की मांग बढ़ी। रीना ने बताया कि वह गांव-गांव जाकर महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं। कई महिलाएं उनके साथ काम भी करती हैं। आरसेटी बाजार एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से विभिन्न स्थानों पर स्टाल लगाने का अवसर मिला। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित करने का कार्य भी कर रही हैं। आरसेटी के कार्यक्रम संयोजक अमित चौबे ने बताया कि खंड विकास अधिकारी नीरू मलिक के प्रयासों से विकास खंड में गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं में उत्साह है। स्वरोजगार स्थापना को सहयोग किया जाता है। रीना आसपास महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। पैंतीस महिलाओं को आरसेटी में प्रशिक्षण को भेजा है।


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