दुर्गा का बहुत बहुत आभार लाइब्रेरी हेतु पुस्तक पहुंचाने के लिए, ढेर सारा स्नेह और आशीर्वाद... माणिक जी का भी शुक्रिया इस बड़प्पन के लिए...
विद्यार्थी तो ये हम सभी के हैं सर... इन पर KVA का या मेरे अकेले का हक नहीं, बल्कि KVA ग्रुप से जुड़े प्रत्येक मेंटोर शिक्षक का भी बराबर अधिकार है... हालांकि ये सब प्रयोग और उनके परिणाम तो बस शिक्षक के रूप में पेशेवर जीवन का हिस्सा हैं... पर वन वीक सीरीज के दौर में चूंकि आजकल ऐसे विद्यार्थियों की कमी सी है, तो यदि इसे उपलब्धि समझा भी जाए तो इसे मैं उन सभी साथी शिक्षकों से साझा करना चाहूंगा जिन्होंने इन बच्चों को पुस्तकों का महत्व समझाने और इस संस्कृति का हिस्सा बनने में अपना योगदान दिया... मेरा काम तो बस इन्हे उस वातावरण में धकेलना मात्र था... शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में करने के लिए ज्यादा कुछ स्कोप बचा नही है वैसे भी अब... उस बारे में कई बार लिख चुका हूं पहले भी....
फिजिक्स में एक प्रक्षेपण वेग (पलायन वेग) का कॉन्सेप्ट होता है.. पृथ्वी से एक पिंड को यदि हम एक निश्चित वेग (11.2 किमी प्रति सैकेंड) से फेंके तो वह पिंड पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से बाहर होकर अपनी कक्षा में परिक्रमा करने लगता है फिर उसे किसी दबाव, खिंचाव या गति की आवश्यकता नहीं होती। कोशिश यही है कि कई तरह के गुरुत्वाकर्षण (वन वीक सीरीज से लेकर इंस्टाग्राम तक) में उलझने की संभावना के बीच ये बच्चे अपनी सही दिशा ढूंढ लें, तो प्रत्येक माह लिया गया वेतन (नाममात्र का ही सही) अखरेगा नही.
ब्रह्माण्ड में स्थित किसी भी वस्तु पर जो नियम लागू होता है उसका मनुष्य से भी उतना ही सीधा संबंध है क्योंकि हम भी उसी ब्रह्मांड का हिस्सा है... डॉ. कलाम को पढ़ते हुए ये बात तो समझ आ गई थी कि विज्ञान के उन सिद्धांतों का दैनिक जीवन में अनुप्रयोग समझना जरूरी है, जिन्हें विद्यार्थी जीवन में केवल रट्टा मारा था पास होने के लिए एक आर्ट्स का शिक्षक और कर भी क्या सकता है..!!! अपनी कक्षाओं को ही प्रयोगशाला में तब्दील करने की कोशिश करी थोड़ा..और कामयाबी भी मिली।
प्रशांत कुमार बाबा
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