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विचार

आपको एक नई राजनीतिक विचारधारा से परिचित कराता हूं डी एन टी जिसमें हम गुर्जर समाज के अलावा लोधी और राजभर धोबी और वाल्मीकि समाज को भी अपने साथ रख सकते हैं गुर्जर समाज उसका प्रतिनिधित्व करें और राजनीतिक और सामाजिक समरसता  हासिल करें मेरा मानना है कि DNT पर अगर पांचो समाज मिलकर कम करें तो गुर्जरों को राजनीतिक शक्ति प्राप्त हो सकती है क्योंकि अकेला गुर्जर राजनीतिक रूप से इतना सक्षम नहीं है कि वह भारतीय राजनीतिक का प्रतिनिधित्व करें पहले से मौजूद राजनीतिक पार्टियों वह कभी नहीं चाहेंगे  की आप उनका प्रतिनिधित्व करें डीएनटी भारत का वह समाज है जिसने 1857 के विद्रोह से लेकर अब तक विदेशी शासको और देश के शासको द्वारा सिर्फ शोषण किया  गया है आओ एक नई राजनीतिक विचारधारा के साथ राजनीति में कदम रखते हैं और अपने कुछ मांगों के साथ समाज में देश की सरकारों से प्रदेश की सरकारों से मांग करते हैं की DNT से संबंधित जाति विशेष को उनके सर्टिफिकेट जारी करें जिससे सरकार द्वारा उनके नाम पर जारी किए गए राशि को समाज के काम में लगाया जाए एक DNT बोर्ड का  गठन या आयोग बनाया जाए और ओबीसी समाज से बाहर निकल जाए आज महिलाएं इतनी सक्षम है क्यों नहीं रिजर्वेशन की जरूरत नहीं मेरा मानना है कि उन्हें  आपका अधिकार इस रूप में दिया जाए कि वह इस काबिल है कि वह राजनीतिक रूप से परिपक्व है और शासन कर सकते हैं जब वह घर चला सकते हैं कंपनियां चला सकते हैं स्कूल चला सकते हैं कॉलेज चला सकते हैं हॉस्पिटल चला सकते हैं तो मेरा मानना है कि वह देश और प्रदेश भी चला सकती हैं इसमें ग्रुप में बहुत सारे बुद्धिजीवी लोग और एजुकेशन क्षेत्र से और बिजनेस क्षेत्र से और आर्मी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं मेरा मानना है कि चार समाजों के लोगों के लिए सैनिक स्कूलों की स्थापना प्राइवेट पार्टनरशिप पर सरकार के साथ समाज को मांग करनी चाहिए जिससे समाज राजनीतिक रूप से सीधा युवा वर्ग से जुड़े जो रोजगार की बात करता है अपने अधिकारों की बात करता है सैनिक स्कूल से पढ़ा हुआ युवा और युवती अपना भविष्य तय कर सकते हैं कि उन्हें कहां नौकरी करनी है उनके अंदर एक डिसिप्लिन आएगा एक जिम्मेदारी आएगी जिससे वह समाज की प्रति अपनी उच्च को  कोटी की भावनाओं के साथ कार्य कर सके सरकार की 100 सैनिक स्कूल खोलने की योजनाओं में समाज की भागीदारी का योगदान बढ़-चढ़कर होना चाहिए मेरा मानना है कि आप राजनीतिक झूठी दिलासा से राजनीतिक राजनीतिक पार्टियों का गठन नहीं कर सकते ना ही लोग आपके साथ आएंगे क्योंकि आज समाज इतना पारिवारिक हो गया है कि वह अपना अच्छा और बुरा समझता है आप उनसे राजनीतिक बातें करो आपसे दूर हो जाएगा Sainik School se मेरा प्राय है कि जिसमें समाज और सरकार की भागीदारी हो आर्मी और एयर फोर्स और नेवी से रिटायर लोगों का  31 या 51 लोगों का बोर्ड बनाया जाए जो समाज से सैनिक स्कूल के लिए अपनी जमीन की व्यवस्था करने को कहे और उसके बाद रक्षा मंत्रालय और वित मंत्रालय से इसके संचालन के लिए समाज कह सकता है सकता है जिससे युवा को रोजगार मिलेगा और वह आपकी राजनीतिक इच्छा की पूर्ति भी करेंगे तो जो मार्शल कॉम 1857 के युद्ध और या विद्रोह में शामिल रही है वह चार-पांच मार्शल  जाती के बच्चे अपना भविष्य इन सैनिक स्कूलों में तय कर सकते हैं क्योंकि सभी  और पीसीएस और डॉक्टर और इंजीनियर नहीं बन सकते कुछ लोग बहादुर सैनिक भी बनेंगे अगर कुछ लोगों को यह मेरा सुझाव अच्छे लगे तो इस पर चर्चा कर सकते हैं।

राजकुमार (संवाद से साभार)

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