सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अनियमितता

FDDI, नेटवर्क में मौजूद त्रुटियों का पता लगाने और उन्हें सुधारने में सक्षम है। इसका उपयोग WAN (वाइड एरिया नेटवर्क) और CAN (कैंपस एरिया नेटवर्क) में भी किया जाता है। FDDI की छमता अधिक होती है जिसमें एक समय में हजारों यूजर डेटा को ट्रांसफर कर सकते है।

FDDI की डेटा को ट्रांसफर करने की स्पीड 100 Mbps होती है। यानी एक सेकंड में 100 MB डेटा को ट्रांसफर किया जा सकता है।

FDDI का एक दूसरा वर्जन भी है जिसका नाम FDDI-2 है। FDDI-2 का उपयोग ज्यादातर बड़ी कंपनियों में आवाज, वीडियो, समाचार, ऑनलाइन लेक्चर  और वीडियो कान्फ्रेंसिंग करने के लिए किया जाता है।

इस वर्जन का उपयोग करके हम मल्टीमीडिया से सबंधित चीजों को ट्रांसफर कर सकते हैं। यह वर्शन 200 Mbps की स्पीड से डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान को ट्रांसफर कर सकता है।

FDDI में dual counter-rotating रिंग टोपोलोजी का इस्तेमाल किया जाता है। इसको ANSI ने 1986 में विकसित किया था।

फेसबुक पेज School&College Listings से (वर्ष 2016)

दोस्तो! इन दिनों चल रहे एफडीडीआई के तमाशे को सब लोग देख रहे हैं! आज हम लोग फिर से दो साल की मेहनत के बावजूद फिर से उसी जगह आ कर खड़े हैं, जहा से शुरुआत की थी। कुछ लोगों की गलतियों के कारण आज फिर से हमारी आवाज कोई नहीं सुन रहा। FDDI जो शुरू से चाहती थी, वो अब सच हो रहा है। आज हम लोगों में यूनिटी नहीं रही, जिसका फायदा एफडीडीआई उठा रही है। सब जानते हैं कि FDDI की डिग्री और डिप्लोमा दोनों फ़र्ज़ी हैं, मगर फिर भी हम लोग FDDI के झांसे में आ गए। कल तक ये FDDI वाले भीगी बिल्ली की तरह भागते थे, मगर आज बड़ी चौर में आकर खड़े हो जाते हैं। क्या डिग्री इशू सुलझ गया? FDDI की शुरू से कोशिश थी कि हम लोग इग्नू की डिग्री लें और आज यही होने जा रहा है। मेवाड़ की डिग्री सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के लाइट में सही नहीं हो सकती, और मंत्री भी ये बात मानती है। फिर कोई हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कैसे बदल सकता है?सोचो! और! जब मेवाड़ सही नहीं होगा तो उसकी क्रेडिट भी सही नहीं होगी, यानि हमारे मार्क्स किसी रेगुलर यूनिवर्सिटी को ट्रांसफर नही हो सकते। तो जो एक ऑप्शन बचेगा वो इग्नू को क्रेडिट ट्रांसफर होगा, लेकिन ये भी पॉसिबल नहीं है, 2015 का उदाहरण आप देख लीजिये। यानी हम रहेंगे बिना डिग्री के। कोई कोर्ट कभी भी कानून तोड़ने का फैsला नहीं देगा.

आप लोग यह सब जानते हुए भी एग्जाम दे रहे हैं। दीजिये हमने नहीं रोका आपको, आज की स्थिति मंत्रालय के हिसाब से हम लोगों के डिग्री के ऊपर कोई काम नहीं हो रहा है। कोई कहता है कि हो रहा है, तो आप बताइये कि एफडीडीआई की फाइल कहा है?एफडीडीआई चाहती है की हमलोग जल्दी से एग्जाम दे के निकले और उनका झंझट ख़त्म हो। और! यही हो रहा है। 2012 के कितने बच्चे आज आते हैं ?  इसी तरह 2013 भी निकल जाएगा। कुछ दिनों में और 2014 के भी कुछ बैच। फिर बचेगा कौन? कोई नहीं। कोर्ट में तीन करोड़ मामले पेंडिंग है, हमारा भी एक हो जाएगा, क्या फ़र्क़ पड़ता है?
जागो और अपने हक़ की लड़ाई करो। संदीप लड़ रहा है, लेकिन वो अकेला हो गया है। डिग्री सबको चाहिए, तो लराई एक की क्यू? संदीप को कुछ हो गया फिर? धमकी तो मिलती ही है उसको।
अब भी नहीं जगे तो भगवान मालिक आपका!
वंदे मातरम!
इंटरनेट से साभार

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...