FDDI, नेटवर्क में मौजूद त्रुटियों का पता लगाने और उन्हें सुधारने में सक्षम है। इसका उपयोग WAN (वाइड एरिया नेटवर्क) और CAN (कैंपस एरिया नेटवर्क) में भी किया जाता है। FDDI की छमता अधिक होती है जिसमें एक समय में हजारों यूजर डेटा को ट्रांसफर कर सकते है।
FDDI की डेटा को ट्रांसफर करने की स्पीड 100 Mbps होती है। यानी एक सेकंड में 100 MB डेटा को ट्रांसफर किया जा सकता है।
FDDI का एक दूसरा वर्जन भी है जिसका नाम FDDI-2 है। FDDI-2 का उपयोग ज्यादातर बड़ी कंपनियों में आवाज, वीडियो, समाचार, ऑनलाइन लेक्चर और वीडियो कान्फ्रेंसिंग करने के लिए किया जाता है।
इस वर्जन का उपयोग करके हम मल्टीमीडिया से सबंधित चीजों को ट्रांसफर कर सकते हैं। यह वर्शन 200 Mbps की स्पीड से डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान को ट्रांसफर कर सकता है।
FDDI में dual counter-rotating रिंग टोपोलोजी का इस्तेमाल किया जाता है। इसको ANSI ने 1986 में विकसित किया था।
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दोस्तो! इन दिनों चल रहे एफडीडीआई के तमाशे को सब लोग देख रहे हैं! आज हम लोग फिर से दो साल की मेहनत के बावजूद फिर से उसी जगह आ कर खड़े हैं, जहा से शुरुआत की थी। कुछ लोगों की गलतियों के कारण आज फिर से हमारी आवाज कोई नहीं सुन रहा। FDDI जो शुरू से चाहती थी, वो अब सच हो रहा है। आज हम लोगों में यूनिटी नहीं रही, जिसका फायदा एफडीडीआई उठा रही है। सब जानते हैं कि FDDI की डिग्री और डिप्लोमा दोनों फ़र्ज़ी हैं, मगर फिर भी हम लोग FDDI के झांसे में आ गए। कल तक ये FDDI वाले भीगी बिल्ली की तरह भागते थे, मगर आज बड़ी चौर में आकर खड़े हो जाते हैं। क्या डिग्री इशू सुलझ गया? FDDI की शुरू से कोशिश थी कि हम लोग इग्नू की डिग्री लें और आज यही होने जा रहा है। मेवाड़ की डिग्री सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के लाइट में सही नहीं हो सकती, और मंत्री भी ये बात मानती है। फिर कोई हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कैसे बदल सकता है?सोचो! और! जब मेवाड़ सही नहीं होगा तो उसकी क्रेडिट भी सही नहीं होगी, यानि हमारे मार्क्स किसी रेगुलर यूनिवर्सिटी को ट्रांसफर नही हो सकते। तो जो एक ऑप्शन बचेगा वो इग्नू को क्रेडिट ट्रांसफर होगा, लेकिन ये भी पॉसिबल नहीं है, 2015 का उदाहरण आप देख लीजिये। यानी हम रहेंगे बिना डिग्री के। कोई कोर्ट कभी भी कानून तोड़ने का फैsला नहीं देगा.
आप लोग यह सब जानते हुए भी एग्जाम दे रहे हैं। दीजिये हमने नहीं रोका आपको, आज की स्थिति मंत्रालय के हिसाब से हम लोगों के डिग्री के ऊपर कोई काम नहीं हो रहा है। कोई कहता है कि हो रहा है, तो आप बताइये कि एफडीडीआई की फाइल कहा है?एफडीडीआई चाहती है की हमलोग जल्दी से एग्जाम दे के निकले और उनका झंझट ख़त्म हो। और! यही हो रहा है। 2012 के कितने बच्चे आज आते हैं ? इसी तरह 2013 भी निकल जाएगा। कुछ दिनों में और 2014 के भी कुछ बैच। फिर बचेगा कौन? कोई नहीं। कोर्ट में तीन करोड़ मामले पेंडिंग है, हमारा भी एक हो जाएगा, क्या फ़र्क़ पड़ता है?जागो और अपने हक़ की लड़ाई करो। संदीप लड़ रहा है, लेकिन वो अकेला हो गया है। डिग्री सबको चाहिए, तो लराई एक की क्यू? संदीप को कुछ हो गया फिर? धमकी तो मिलती ही है उसको।
अब भी नहीं जगे तो भगवान मालिक आपका!
वंदे मातरम!
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