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जानें जीवन को (साक्षात्कार)

साथियो! आज की वार्ता में हमारे साथ एक ऐसे प्रतिभाशाली शख्स मौजूद हैं जिन्होंने केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण विभाग का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया। श्री नरेंद्र जी गेल के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और इन्द्रप्रस्थ गैस लिमिटेड से प्रबंध निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हैं। मृदुभाषी और जिज्ञासु नरेंद्र जी की विशेषता यह है कि उन्होंने न केवल विभाग को अप टू डेट रखा, बल्कि स्वयं और परिवार को पूरी तरह स्वस्थ रखा। उन्होंने शोध कर डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त की। स्वागत है प्रतिकूल स्थितियों में भी जीवन मूल्यों को बनाए रखने वाले नरेंद्र जी का। 
प्रश्न - नरेंद्र जी, परिवार हो या फिर कार्यस्थल। "क्या इनकी नब्ज़ को पहिचान कर स्वस्थ परिवेश दिया जा सकना संभव है?" 
उत्तर - आप यह जान लें कि परिवार या कार्यस्थल पर उसकी विशिष्ट आवश्यकताओं को देखकर एक अच्छा और सकारात्मक माहौल देना हमेशा संभव होता है, लेकिन इसके लिए सदैव बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और कड़े फैसले लेने होंगे। आप, मैं या कोई भी जब वरिष्ठ कैडर में या संस्था के प्रमुख के रूप में काम कर रहे होते हैं, तो संगठन की प्राथमिक, सर्वोपरि व सर्वप्रथम आवश्यकता होती है क्योंकि इसका कार्य नियमन पर सीधा, दीर्घकालिक और व्यापक प्रभाव होता है। मैंने हमेशा कार्य-जीवन में हर प्रकार का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की और ईश्वर ने मेरे प्रयासों को सदैव आशीष दिए। यदि हम स्वयं पारदर्शी हों, तो यह संभव है। 
प्रश्न - "जीवन को संकल्पबद्ध तरीके से जी पाना क्या असंभव है?" उत्तर - यह मुश्किल ज़रूर है, लेकिन असंभव नहीं। इस हेतु व्यक्ति में आत्मविश्वास होना बेहद जरूरी है। जीवन में अनुशासन की प्रमुख भूमिका होती है जो वर्तमान समय में अनिवार्यता हो गई है। इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रबल आवश्यकता है। वर्तमान में जहां मैं कार्यरत हूं वहां मेरी प्राथमिकताएं हमेशा संगठन स्वास्थ्य और परिवार रही हैं। 
प्रश्न - "आपने शोध करने का निर्णय कब और क्यों लिया?" 
उत्तर - मैंने वर्ष 2011 में शोध कार्य करने का निर्णय लिया और वर्ष 2016 में 58 वर्ष की आयु में शोध पूरा किया। यह निर्णय मेरे ज्ञान के आधार को बढ़ाने के लिए लिया गया था। यद्यपि इससे मुझको कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ, लेकिन इससे मेरे आत्मविश्वास में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई। 
प्रश्न - "शोध करने के उपरांत आपको क्या अनुभूति हुई थी? उसका जीवन में आपको क्या लाभ मिला?" 
उत्तर - मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। साथ ही समाज में मेरा मान - सम्मान बढ़ा। जब गेल ने मेरे नाम के आगे डॉक्टर लिखना शुरू किया तो मुझे गर्वानुभूति महसूस हुई। हां, कोई सीधा वित्तीय लाभ नहीं हुआ। गेल और आईजीएल से सेवानिवृत्ति के बाद, मैंने लखनऊ में एक बहुत प्रतिष्ठित गैस कंपनी के लिए उत्तर प्रदेश के राज्य प्रमुख के रूप में काम करना शुरू किया। एक बार जब मैं इस असाइनमेंट से मुक्त हो जाऊंगा, तो मुझे इंजीनियरिंग कॉलेज या प्रबंधन कॉलेजों में काम करने के बहुत सारे अवसर मिलेंगे, क्योंकि पीएचडी के साथ संकायों की हमेशा कमी रहती है। इस सबसे मिलने वाली अनुभूति और अपने अनिवार्य दायित्वों को पूरा कर देने की अनुभूति मुझको निरंतर ऊर्जित रखती है। 
प्रश्न - "क्या जीवन की प्रत्येक गतिविधि को लाभ-हानि की कसौटी पर परखा जाना चाहिए? यदि हां, तो प्लीज अपना आत्मावलोकन करें!" 
उत्तर - देखिए, हमें जीवन की हर गतिविधि को उसके वित्तीय लाभ के आधार पर नहीं देखना चाहिए। हर किसी को समाज से कुछ न कुछ चीजें जरूर मिलती हैं, जिनको हमें किसी भी रूप में समाज को वापस निश्चित ही लौटाना चाहिए। व्यक्तियों को उनकी क्षमताओं को देखते हुए नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करें। यदि कोई व्यक्ति योग्य व्यक्तियों को मार्गदर्शन देकर या आर्थिक रूप से मदद कर सके तो इससे समाज को बहुत मदद मिलेगी। 
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