"पंच आए, सरपंच भी आए, आया सर्व समाज।
हर गाँव में हो लाइब्रेरी, पानीपत ने दी ये आवाज।।"
ऐतिहासिक शहर पानीपत हमेशा से ही बड़े बदलावों का साक्षी रहा है और बीते शनिवार को एक बार फिर पानीपत शहर एक अनूठे आयोजन का साक्षी बना।
पानीपत स्थित गुर्जर भवन में जनपद के सर्वसमाज के सम्मानित नागरिकों को एक बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था, ताकि हर गाँव में लाइब्रेरी अभियान के तहत पानीपत जिले के हर एक युवा को निःशुल्क पुस्तकालय की सुविधा मिल सके।
घण्टों तक चली यह चर्चा बहुत ही अर्थपूर्ण रही और इस स्तर पर सैनी समाज से आए उद्योगपति श्री रविंद्र सैनी जी ने मंच से ही घोषणा कर दी कि सैनी समाज के महात्मा ज्योतिबा फुले संस्थान में अगले एक महीने के भीतर लाइब्रेरी बन जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान गुर्जर भवन के प्रधान श्री कर्ण सिंह रावल जी और श्री राजकुमार छोकर जी ने टीम ग्राम पाठशाला को अवगत कराया कि गुर्जर भवन में पहले से ही एक लाइब्रेरी बनी हुई है और इसमें पढ़ रहे युवा बहुत बेहतर परिणाम भी दे रहे हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बहन संगीता बैसला जी को सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में बहन संगीता बैसला जी ने कहा कि पानीपत के सभी लोग मिलकर पानीपत जिले के हर गाँव में पुस्तकालय बनाने के लिए दृढ़संकल्पित हैं और उनका भी सपना है कि ग्राम पाठशाला का संकल्प समय से पहले पूरा हो।
समाचार प्रदाता श्री लाल बहार
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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