લાઠીનાદુધાળા ખાતે પદ્મશ્રી શેઠપાલસિંહનુ કિસાન સંઘ દ્વારા સન્માન કરવામાં આવ્યું અમરેલી, તા.૧૯
લાઠી તાલુકાના દુધાળા ગામે સવજીભાઈ ધોળકીયા દ્વારા બનાવવામાં આવેલ હેતની હવેલી ખાતે પધારેલા ઉત્તરપ્રદેશના એગ્રીવિભાગના પદ્મશ્રી શેઠપાલ સિંહનુ અમરેલી જીલ્લા કિસાન સંઘ દ્વારા સન્માન કરવામાં આવ્યું હતું. આ તકે જિલ્લા પ્રમુખ વસંતભાઈ ભંડેરી અને ભાસ્કરભાઈ મેંદપરા, રામજીભાઈ ગુજરાતી, બીએલ
ધોળકીયા તેમજ તાલુકા મંત્રી પ્રેમજીભાઈ મેંદપરા તથા ધોળકીયા ફાઉન્ડેશનના કનકભાઈ પટેલે હાજર રહી કાર્યક્રમને સફળ બનાવ્યો હતો.
पद्मश्री सेठपाल सिंह को किसान संघ द्वारा लथिनादुधला, अमरेली, 19 में सम्मानित किया गया
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के पद्मश्री सेठपाल सिंह को लाठी तालुक के दुधला गांव में सवजीभाई ढोलकिया द्वारा निर्मित हेतानी हवेली में अमरेली जिला किसान संघ द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष वसंतभाई भंडेरी और भास्करभाई मेंडपारा, रामजीभाई गुजराती, बी.एल ढोलकिया और तालुक मंत्री प्रेमजीभाई मेंदपारा और ढोलकिया फाउंडेशन के कनकभाई पटेल उपस्थित थे और कार्यक्रम को सफल बनाया।
सूचना स्रोत - सेठपाल सिंह
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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