मासिक उलझन सुलझन के लिए ख्यातिलब्ध लेखक डाक्टर राजेश राजन की रचना 'दिख गए मुझे गांधी'
दिख गए मुझे गांधी
सितारों के बीच घूमते हुए
पृथ्वी की ओर देखते हुए
पूछा मुझसे
सुख से जी रहे हैं भारतवासी
आजादी में
साबरमती कल-कल करती होगी
क्या लोकतंत्र हावी है भारत में
मेरे चरखे से कपास उड़ते होंगे ताने बनकर
गंगा-यमुना का स्वर्णिम संगम
यूँ ही शोभित है क्या?
मजहब की दीवारें गिर चुकी होंगी शायद
क्या गरीबी और बेरोजगारी समाप्त हो गई?
इंसानियत की नई पौध की तरह
अरे भाई बताना तो नाथूराम का क्या हुआ?
उसके बच्चे बड़े हो गए होंगे
वो शायद अच्छे होंगे
और
वो पाकिस्तान लहलहा रहा है
या फिर मर गया है अपनी मौत
क्योंकि
कट्टरता से खतरनाक कुछ भी नहीं है।
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