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गिनीज़ बुक के प्रथम संस्करण दिवस पर स्मरण

27 अगस्त, 1955 को ब्रिटेन में 'द गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' का प्रथम संस्करण प्रकाशित किया गया था, जिसे 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' भी कहा जाता है। दुनिया और लोगों के बारे में हर प्रकार के रिकॉर्ड को संग्रहित करने वाली एक वार्षिक पुस्तक है। दुनिया भर में प्रकाशित होने वाली इस पुस्तक का 40 से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया जाता है। यह पुस्तक प्रकाशन के इतिहास में सबसे अधिक बिकने वाली कॉपीराइट पुस्तकों में से एक है। इस पुस्तक की प्रेरणा गिनीज ब्रूअरी के प्रबंध निदेशक सर ह्यू बीवर को नवंबर 1951 में मिली, जब वह अपने दोस्तों के साथ आयरलैंड में शिकार कर रहे थे। बीवर 'गोल्डन प्लोवर' पक्षी पर निशाना लगाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसकी रफ्तार के आगे वह विफल रहे। तब उन्हें ख्याल आया कि क्या यह जीव यूरोप का सबसे तेज रफ्तार में उड़ने वाला पक्षी है? उन्होंने दोस्तों से पूछा, लेकिन कोई इस बारे में नहीं जानता था। फिर उन्होंने इसका उत्तर किताबों में खोजने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें ऐसी कोई किताब भी नहीं मिली। तब बीवर ने ऐसी जानकारियों को एक जगह संग्रहित करने के लिए खेल पत्रकार नॉरिस और रॉस मैकविहटर से मदद मांगी। 1954 में पुस्तक के प्रकाशन के लिए उन्होंने गिनीज सुपरलेटिव्स लिमिटेड की स्थापना की। एक साल बाद यानी 1955 में मैकविहटर भाइयों ने लगभग 4,000 प्रविष्टियों और 198 पेज का अपना पहला संस्करण प्रकाशित किया, जिसे कई अध्यायों में विभाजित किया गया था, जैसे कि 'द यूनिवर्स', 'द ह्यूमन बीइंग', 'द नेचुरल वर्ल्ड' एवं 'द वर्ल्डस स्ट्रक्चर्स'। पुस्तक को नाम दिया 'द गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स'। यह पुस्तक शीघ्र ही बहुत लोकप्रिय हो गई और केवल चार महीनों में ही ब्रिटेन की सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक बन गई। सन 1956 में इसके तीन अन्य संस्करण जारी किए गए, जिनमें एक अमेरिकी संस्करण भी था। मैकविहटर बंधु अपनी रिसर्च और तथ्य-जांच कार्यों के लिए प्रसिद्ध थे। रॉस मैकविहटर सन 1975 और नॉरिस मैकविहटर सन 1986 तक इस पुस्तक के संकलन में शामिल रहे। 2022 तक प्रकाशन के डेटाबेस में 60,000 से अधिक विश्व रिकॉर्ड सूचीबद्ध किए गए थे। सोनीपत से आदित्य ओम (दैनिक अमर उजाला के 27.08.2023 अंक से साभार)

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