श्रीनगर (कश्मीर)। महिला क्रिकेटरों का मनोबल बढ़ाने के लिए भारतीय सेना ने शनिवार को यहां एक महिला क्रिकेट लीग शुरू की है, जिसमें घाटी से 12 टीमें भाग ले रही हैं। कर्नल मनोज डोबरियाल ने कहा कि महिला लीग सेना की सद्भावना परियोजना के तहत आयोजित की जा रही है और इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।
कर्नल मनोज ने कहा, 'लीग शेर- ए-कश्मीर स्टेडियम में हो रही है जिसमें बारह टीमें भाग ले रही हैं। इसमें से तीन टीमें श्रीनगर से हैं जबकि बाकी टीमें कश्मीर के अन्य जिलों से हैं।' एजेंसी
ऐसे ही कार्यक्रमों की जरूरत - प्रतिक्रियाएं
सभी को खेलों में पूरे उत्साह के साथ भाग लेना चाहिए। हम देख रहे हैं कि पोलोव्यू मार्केट और लाल चौक पर क्रिकेट खेला जा रहा है।
वी.के. विधूड़ी, संभागीय आयुक्त, कश्मीर
इस तरह के और अधिक कार्यक्रम आयोजित कराए जाने चाहिए। इस टूर्नामेंट को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों की जर्सी, मैदान, आवास आदि मिल रहे हैं।
महिलाओं को आगे बढ़ते देखकर कश्मीर विश्वविद्यालय की कोच सकीना अख्तर ने कहा।
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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