राजकीय उच्च-माध्यमिक विद्यालय में मारवाड़ सेवा समिति के शिक्षा एवं रोजगार परामर्श प्रकोष्ठ के तत्वावधान में काउंसलिंग सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के मुख्य वक्ता राणावास गर्ल्स बीएड कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्तकुमार गुर्जर ने हाल ही आयोजित होने वाली केंद्रीय विश्वविद्यालयों के प्रवेश के लिए अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा सीयूएट 2023 की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि वे बीस वर्ष पहले इसी विद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं। उनके अनुसार हमारे गांवों के बच्चों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है किंतु उचित गाइडेंस के अभाव में उनकी प्रतिभा को अवसर नहीं मिल पाते हैं। वे और उनके कुछ साथी बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों को सेंट्रल यूनिवर्सिटीज के फॉर्म भरने से लेकर तैयारी और एडमिशन तक हैंड होल्डिंग के प्रयास में संलग्न हैं। उन्होंने वर्तमान में बच्चों के लिए आवश्यक प्रासंगिक विषय जैसे ज्ञान की असमानता, कॅरियर सलेक्शन, भारत में उच्च शिक्षा के स्ट्रेक्चर, रीडिंग एंड रिफ्लेक्शन आदि मुद्दों को भी समझाया। सेवा समिति के राजेंद्र हल्दानिया ने बताया कि सेमिनार में ग्यारहवीं व बारहवीं के विद्यार्थियों और अभिभावकों को आमंत्रित किया गया। प्रधानाचार्य आर. घनश्याम सापेला ने व्यक्तित्व निर्माण एवं कॅरियर संबंधी अन्य जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में उपप्राचार्य भंवरसिंह राजपुरोहित, व्याख्याता यशवंत भाटी, मानकचंद, राजूकुमारी, रमेश साहू, दलपतसिंह सांखला, लच्छीराम प्रजापति, तेजसिंह सोढ़ा, गोपेश शर्मा, यादवेंद्रसिंह, अविनाश भाटी, इमानुएल स्कूल के गजेंद्र गौड़ सहित अन्य उपस्थित थे।
मारवाड़ जंक्शन @ पत्रिका से साभार
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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