संदर्भ - क्रांतितीर्थ समिति मेरठ प्रांत के बैनर तले बहसूमा में सन् 1857 के अमर बलिदानी दलेल सिंह-पृथ्वी सिंह की स्मृति में आज एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अमर क्रांतिकारी दलेल सिंह-पृथ्वी सिंह के वंशज श्री वेदपाल सिंह ने, जबकि संचालन कार्यक्रम संयोजक सभासद विरेन्द्र सिंह ने किया। मुख्य अतिथि श्री सुभाष गुर्जर चेयरमैन बहसूमा सहकारी समिति रहे।
मुख्य वक्ता का उद्बोधन - मुख्य वक्ता अशोक चौधरी ने दलेल सिंह-पृथ्वी सिंह एवं बहसूमा की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए बताया कि किला परीक्षितगढ़ के राजा राव कदम सिंह के रिश्ते के भाई दलेल सिंह-पृथ्वी सिंह ने बरेली के क्रांतिकारी बख्त खां के नेतृत्व में दिल्ली जाने वाली क्रांतिकारी सेना को गढ़ गंगा ब्रजघाट पुल को पार कराने में राव कदम सिंह के साथ महत्वपूर्ण भूमिका भूमिका निभाई थी। सेना को पुल पार कराने के बाद अंग्रेजों की बाबूगढ़ में स्थित सैनिक छावनी को इस सेना ने तहस-नहस कर दिया था तथा अंग्रेजों के सभी घोड़े छीन लिए थे। इस घटना के बाद ही अंग्रेजों ने भारतीय क्रांतिकारियों पर मिलिट्री कार्यवाही करते हुए तोपों से हमला करना शुरू कर दिया था।
कार्यक्रम का ध्येय - क्रांतितीर्थ समिति मेरठ प्रांत में स्थित क्रांतिवीरों के गांवों में जाकर उनकी स्मृति में क्रार्यक्रम कर बलिदानियों के वंशजों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित कर रजकण एक स्मारक के लिए एकत्रित कर रही है। समिति संयोजक अश्विनी त्यागी जी ने समिति के कार्यक्रम की रूपरेखा विस्तार से बताई।
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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