सहारनपुर पॉलिटेक्निक में कार्यरत यान्त्रिकी के अनुदेशक देवेन्द्र कुमार को 25 जून 2015 को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (ए०आई०सी०टी०ई०) ने हिंदी में मौलिक लेखन के लिए उनकी रचना 'तकनीकी आरेखन' को प्रथम पुरस्कार से पुरस्कृत किया। यह प्रथम अवसर है जब किसी लेखक को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है। देवेन्द्र कुमार की इस पुस्तक का प्रकाशन मेरठ के अरिहन्त प्रकाशन द्वारा किया गया था।
पुरस्कारस्वरूप श्री देवेन्द्र कुमार को 51000 रुपये की धनराशि का चेक और प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुआ है।
यह पुरस्कार प्राप्तकर देवेन्द्र कुमार ने अपने क्षेत्र सहित पूरे जनपद सहारनपुर का नाम रोशन किया है। लेखक श्री देवेन्द्र कुमार सहारनपुर जनपद के ग्राम सालारपुरा से हैं, जिनकी मां सुषमा देवी और पिता पहल सिंह हैं। उनके घर जन्मे देवेन्द्र का परिवार कृषि से जुडा है। देवेन्द्र कुमार वर्ष 2007 से सहारनपुर पॉलिटेक्निक में सेवारत है और उनके कुशल लेखन के कारण ही के कारण उनके दायित्वों में वृद्धि होती रही है। यह भी एक अनोखी बात है कि पुरस्कृत तकनीकी आरेखन रचना देवेन्द्र की प्रथम पुस्तक है।
अपनी उपलब्धि के लिए देवेन्द्र कुमार अपने परिवार के विशेष योगदान को अपनी सफलता का श्रेय देते है। इसके अलावा लेखक देवेन्द्र कुमार ने पॉलिटेक्निक पाठ्यक्रम की पुस्तक अनुप्रयुक्त यांत्रिकी, अभियान्त्रिक आरेखन, अभियान्त्रिकी यांत्रिकी एवं पदार्थ तथा आई०टी०आई० पाठ्यकम की मैकेनिकल आरेखन,ñ इलेक्ट्रीकल, आरेखन, डीजल मैकेनिकल आरेखन आदि पुस्तकों को अरिहन्त द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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