दिल्ली का पुलिस स्टेशन लाजपत नगर! एस.एच.ओ. साहब के निमंत्रण पर मैं उनसे मिलने के लिए घर से चला, तो पुलिस स्टेशन के काफी पहले से सड़क पर लगे साइन-बोर्ड मुझे लाजपत नगर पुलिस स्टेशन के प्रवेश द्वार तक ले गए। थाना लाजपत नगर में प्रवेश करते ही ठीक सामने एक रंग-बिरंगी इमारत दिखी जिसकी दीवार पर कुछ पुस्तकों के चित्र और कुछ अन्य कलाकृतियां बनी हुई थीं। दीवार के एक हिस्से पर लिखा था 'Child Friendly Room' और दूसरे हिस्से पर 'Delhi Police Public Library' .
मुझे लगा कि मैं किसी गलत जगह पर आ गया हूँ। इसलिए मैं वापिस चलने के लिए मुड़ा, लेकिन दाहिनी ओर मुड़ते ही देखा कि सामने से एस.एच.ओ. श्री सत्यप्रकाश जी स्वयं ही आ रहे थे। एस.एच.ओ. साहब बोले कि बाकी बातें बाद में करेंगे पहले आपको अपने थाने की लाइब्रेरी दिखाते हैं, क्योंकि मैंने आपको अपनी लाइब्रेरी दिखाने के लिए ही बुलाया है। फिर हम लाइब्रेरी के अंदर गए तो देखा कि बच्चे बड़े इत्मीनान से पढ़ रहे थे।
लाइब्रेरी के अंदर बच्चों को पढ़ते हुए देखकर मन प्रफुल्लित हो गया। फिर लाइब्रेरी से बाहर आते हुए एस.एच.ओ. साहब ने बताया कि यह लाइब्रेरी तब तक खुली रहती है जब तक आखिरी बच्चा उठकर नहीं चला जाता। उन्होंने यह भी कहा कि वह ग्राम पाठशाला की मुहिम से बहुत प्रेरित हैं और अपने गाँव में भी एक लाइब्रेरी बनवाने के लिए प्रयासरत हैं।
जीवन भर तमाम किस्म की गतिविधियां चलती रहती हैं, पर आप यदि कभी इस थाने की लाइब्रेरी को देखने आयेंगे तो आप भी दिल्ली पुलिस की इस पहल पर गर्व करेंगे। लाल बहार (ग्राम पाठशाला वॉलिंटियर)
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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