सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मिशन की अलख जगाने का प्रण

इस प्रण के साथ टीम ग्राम पाठशाला ने 7 जून को नोएडा के घरबरा से अपनी पदयात्रा का शुभारंभ किया। यह वह अवसर था जब अनंत लोगों तक एक साथ एक दम अपना प्रसार करना था।
सहारनपुर प्रवास
सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हर गांव पुस्तकालय की मुहिम ने जहां देश के विभिन्न राज्यों के पांच सौ से अधिक गांवों में पुस्तकालयों का निर्माण करा लिया है और देश के प्रत्येक गांव में पुस्तकालय खोलने का लक्ष्य अपने लिए निर्धारित किया है। सहारनपुर में आई टीम का भव्य स्वागत यहां गुर्जर भवन में समाज के सभी वर्णों, वर्गों, सम्प्रदाय के लोगों द्वारा करते हुए टीम को उनके लक्ष्य में यथासामर्थ्य योगदान देने और श्रेष्ठ विचार एवम कार्य संस्कृति को बढाने का भी भरोसा दिया। 
जारी जानकारी के अनुसार ग्राम पाठशाला से सम्बद्ध डीएसपी ह्यूमन राइट्स लाल बहार ने अवगत कराया कि वर्ष 2020 के अगस्त माह में जिला गाज़ियाबाद के लोनी क्षेत्र अंतर्गत  गनौली गांव में पहली लाइब्रेरी ग्राम पाठशाला द्वारा प्रारम्भ की गई थी जो अब तक सात राज्यों के पांच सौ से भी अधिक गांव में  पुस्तकालय आरंभ करा चुके हैं। इसके संबंध में बिजनौर के सांसद मलूक नागर ने संसद में जब उक्त विचार को रखा तो इसके लिए ग्राम स्तर पर अतिरिक्त बजट की भी व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि गौतमबुद्ध नगर, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़ में भी इसका विस्तार किया है और इससे सम्बद्ध टीम ने सरकारी अवकाशों का उपयोग इसके जन-जागरण हेतु निर्धारित किया है। 
उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर में एसएसपी अभिषेक यादव ने इस विचार और लक्ष्य को समझते हुए एक पुस्तकालय का उद्घाटन किया तो मुजफ्फरनगर में बहुत से गांव में पुस्तकालय प्रारंभ हो पाए। उन्होंने बताया कि इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, चिकित्सक भी उन ग्राम सभाओं में तैयार हो रही पीढ़ी की आवश्यकता के अनुसार छुट्टी के दिन समय देकर बच्चो का मार्गदर्शन भी करते हैं। सहारनपुर में प्रदीप जी एडवोकेट (कांग्रेस नेता) एवम प्रवेश जी को जिला सहारनपुर में लक्ष्य के सापेक्ष दायित्व सौंपा है। 
उनकी टीम में अजय पाल, देवराज सिंंह, देवेंद्र सिंह, मनोज सिंह, संजय सिंह, अमर सिंह, नितिन कुमार, अरविन्द सिंह, योगेंद्र प्रधान, सतेंद्र सिंंह, जितेंद्र सिंंह और  सतेंद्र  हैं, जिनका सहारनपुर के गुर्जर भवन में सुखविंदर सैनी, पूर्ण राणा, घनश्याम प्रमुख, सुदेश प्रधान (ज़िला पंचायत सदस्य), नीरज प्रधान, सुदेश गुर्जर, अक्षय ढायक़ी, वीरेंद्र चौधरी सहित प्रवेश गुर्जर एवम प्रदीप वर्मा एडवोकेट द्वारा भी स्वाग़त किया गया। ऊक्त टीम ने रामपुर ब्लॉक के नल्हेड़ा गुर्जर, भांकला, खानपुुर  
गांव के ग्रामीणों को इसके संबंध में विस्तृत जानकारी दी गयी।
टीम ग्राम पाठशाला का आभार
सहारनपुर की पावन धरा का तहेदिल से आभार!! कल टीम ग्राम पाठशाला सहारनपुर में रही और दोपहर बाद तक सहारनपुर के कई सारे गाँवों में लाइब्रेरी निर्माण हेतु जागरूकता के लिए पदयात्रा की।
बड़े भाई प्रदीप जी और अनुज प्रवेश जी और उनकी समस्त टीम ने तो जैसे पूरे सहारनपुर को ही एकत्रित कर दिया। टीम सहारनपुर ने कितने ही गाँवों में पदयात्रा कराई। हम हर गाँव में नियत समय से कई-कई घंटों विलंब से पहुँच पाए, लेकिन इसके बावजूद गाँव-गाँव लोगों की भारी भीड़ पदयात्रा में शामिल हुई और अपने-अपने गाँवों में लाइब्रेरी बनाने का संकल्प लिया।
टीम ग्राम पाठशाला को इतने सारे गाँवों और लोगों तक पहुँचाने के लिए हम तहेदिल से आपके आभारी हैं।
टीम ग्राम पाठशाला को विश्वास है कि जल्द ही सहारनपुर के सैकड़ों गाँवों में पाठशालाएं / लाइब्रेरी बन जाएंगी।
जनवाणी समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार
बोल युवा क्या मांग है तेरी लाइब्रेरी लाइब्रेरी 
जनवाणी संवाददाता, मेरठ। आप सोच रहे होंगे कि यह एक नारा है तो आप सही सोच रहे हैं पिलखुआ के गांव देहरा की गलियों में गुरुवार को यही नारा गूंज रहा था। ग्राम पाठशाला द्वारा पिलखुआ के अल आफिया पब्लिक स्कूल से लाइब्रेरी के लिए एक जागरूकता रैली निकाली गई, जिसका शुभारंभ चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने किया। यही नहीं जागरूकता रैली में कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने स्वयं भी पूरे गांव का भ्रमण किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि ग्राम पाठशाला द्वारा जो यह अभियान चलाया गया है वह सराहनीय है। ग्राम पाठशाला और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के बीच एक एमओयू भी साइन हुआ है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से 600 से अधिक कॉलेज जुड़े हुए हैं जिनमें लाइब्रेरी खुलवाने के लिए ग्राम पाठशाला के जन-जागरण अभियान में विश्वविद्यालय सहयोग करेगा। कॉलेजों से भी वार्ता की जाएगी कि वे भी इस अभियान से जुड़ें। छात्रों को भी इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर एक बच्चे के हाथ में किताब होनी चाहिए। हर बुजुर्ग हर जवान के हाथ में भी किताब होनी चाहिए। एक किताब पढ़ने से व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है, यदि एक बच्चा पढ़ाई करेगा तो उससे गांव ही नहीं बल्कि देश भी तरक्की करेगा। सभी बच्चों को पढ़ना चाहिए। चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर वीरपाल सिंह ने ग्राम पाठशाला और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बीच हुए एमओयू के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से ग्राम पाठशाला द्वारा हर गांव लाइब्रेरी खोलने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
पिलखुआ स्थित गांव देहरा में जागरूकता रैली के पश्चात गांव पिपलेहड़ा की लाइब्रेरी को देखने के लिए कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला पहुंचीं। ग्राम पाठशाला द्वारा खोली गई इस लाइब्रेरी में पढ़ रहे बच्चों से भी कुलपति ने वार्ता की। लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों ने कुछ किताबों की कमी होने की बात कही। इस पर कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने जल्द ही उन्हें किताब उपलब्ध कराने की बात कही।
जानसठ के ढांसरी में निकाली गई पैदल यात्रा 
(अमर उजाला)
जानसठ। गांव ढांसरी में ग्राम पाठशाला जन-जागरण अभियान के अंतर्गत पैदल यात्रा निकाली गई। ग्रामीणों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया। ग्राम पाठशाला टीम के सदस्य अजयपाल ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 12 जिलों में यह यात्रा 7 जून से चल रही है, जो 11 जून तक चलेगी। ग्राम पाठशाला टीम का उद्देश्य देश के प्रत्येक गांव में लाइब्रेरी की स्थापना किया जाना है। ताकि गांव का युवा भी शहरी परिवेश के अनुसार अपने ज्ञान को लाइब्रेरी के माध्यम से आगे बढ़ा सके। इस पैदल यात्रा में लाल बाहर, अजय पाल, देवेंद्र सिंह, संदीप सिंह, देवराज, सतेंद्र सिंह, अरविंद सिंह, आरिफ खान, सचिन कुमार, नितिन कुमार, गजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
युवाओं में प्रतिस्पर्धा की भावना जाग्रत करने के लिए हर गांव में लाइब्रेरी जरूरी
हीमपुर दीपा (बि.टा.)। ग्राम पाठशाला मिशन के हर गांव एक लाइब्रेरी कार्यक्रम के तहत एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें उप जिलाधिकारी एक्स्ट्रा सदर मांगेराम चौहान का गौरवमयी मार्गदर्शन रहा। पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान मिशन के बैनर तले शिक्षा की अलख जगाते हुए पैदल यात्रा निकाली गई। शुक्रवार को बस स्टैंड हीमपुर दीपा के समीप स्थित पूर्व प्रधान राहुल सिंह के प्रतिष्ठान पर आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए उप जिलाधिकारी श्री चौहान ने बताया कि मिशन का उद्देश्य लाइब्रेरी के माध्यम से शिक्षा का माहौल सृजन करा कर ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं के लिए शिक्षा का माहौल बनाना है। यह तभी संभव हो सकता है जब हर एक गांव में एक लाइब्रेरी हो जहां सामूहिक शिक्षा अध्ययन कर वर्ग में प्रतिस्पर्धा की भावना जागृत होगी। मिशन के आरिफ, अजय पाल, प्रवीण सिंह, अरविंद सिंह, डीएसपी लाल बहार, संदीप कुमार इसमें साथ रहे।
ग्राम पाठशाला द्वारा भारत को पुस्तकालयों का देश बनाने की शुरुआत गाजियाबाद के गनौली गांव से की गई थी, जो काफी कारगर साबित रही। इसी प्रेरणा से 3 साल में 17 राज्यों में लाइब्रेरी स्थापित कराई गई हैं। इस मिशन के पीछे बस एक ही जूनून रहा कि ग्रामीण क्षेत्र हित में भारत को पुस्तकालयों का देश बनाना है, ताकि सभी बच्चे लाइब्रेरी में अध्ययन कर अपना भविष्य संवार सकें। वक्ताओं ने लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि देश और समाज हित में गांव में मिशन के तौर पर एक लाइब्रेरी की स्थापना अवश्य कराएं। इस अवसर पर पं. कमलेश शर्मा, पूर्व प्रधान राहुल सिंह, विनोद कुमार, आर्य चंद्रशेखर, पदम सिंह, डॉ. बबलू गुर्जर, संजय सिंह आदि सहित हीमपुर दीपा, रतनपुर खुर्द, अजुपुरा जट, मारूफपुर, टंगरी, सब्दलपुर आदि गांवों का दौरा किया गया।
सूचना स्रोत - श्री लाल बहार जी एवं श्री अजयपाल जी।




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...