एक प्रश्न दिमाग में आया कि "क्या सोशल मीडिया मनुष्यों का उपयोग कर रहा है या फिर हम मनुष्य सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं?"
इसका गहन परीक्षण यदि करें तो पाएंगे कि प्रश्न पूछता प्रतीत होता है कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म मनुष्यों का उपयोग कर रहे हैं या क्या स्थिति इसके विपरीत है यानि मनुष्य सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंसानों द्वारा इंसानों के इस्तेमाल के लिए बनाए गए टूल या प्लेटफॉर्म हैं।सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म व्यक्तियों को दूसरों के साथ जुड़ने, संवाद करने और जानकारी साझा करने का साधन तो प्रदान करते हैं, लेकिन वो किसी भी रूप में प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण नहीं करते जिसके परिणामस्वरूप कोई भी निष्कर्ष सामने नहीं आ पाता।सोशल मीडिया के साथ जुड़ने के संबंध में उपयोगकर्ताओं का तो अपने कार्यों और निर्णयों पर नियंत्रण होता है, यानि यह सोशल मीडिया के सृजक मानव के स्वाभाविक गुणों को सहेजे होता है। इसके ठीक विपरीत सोशल मीडिया प्लेटफार्म को मानव के सुपुर्द ना करके मानव द्वारा निर्मित मशीनों के सुपुर्द कर दिया गया है।
इसका परिणाम यह हुआ है कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ता के अनुभवों को अनुकूलित करने और सामग्री प्रदर्शित करने के लिए एल्गोरिदम और प्रौद्योगिकियों को नियोजित तो कर सकते हैं, पर विश्लेषित करने में अक्षम रह जाते हैं। यद्यपि यह उपयोगकर्ता ही हैं जो सोशल मीडिया का उपयोग करना चुनते हैं और यह निर्धारित करते हैं कि वे इसके साथ कैसे बातचीत करते हैं? व्यक्ति तय करते हैं कि उन्हें किस प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ना है? कौन सी सामग्री पोस्ट करनी है? या उपभोग करनी है? और वे सोशल मीडिया गतिविधियों के लिए कितना समय और ध्यान आवंटित करते हैं? इन बहुतायत में एकत्रित की जा सकने वाली समस्त सूचनाओं का विश्लेषण न हो पाना विचित्र परिस्थितियों का निरंतर निर्माण कर रहा है। इसलिए, यह कहना अधिक सटीक नहीं कि मनुष्य सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं, बल्कि इसके ठीक विपरीत सोशल मीडिया प्लेटफार्म मनुष्यों का उपयोग कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म उपकरण या माध्यम के रूप में कार्य करते हैं जिसके माध्यम से व्यक्ति खुद को अभिव्यक्त करते हैं, दूसरों से जुड़ते हैं और विभिन्न ऑनलाइन गतिविधियों में संलग्न होते हैं। और? इन विविध गतिविधियों का विश्लेषण न कर पाना विविध समस्याओं का जनक हो गया है।
चैट जीपीटी प्रदत्त पाठ्य सामग्री के गूगल अनुवाद का संशोधित रूप
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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