रूथ गार्डन ने एक बार कहा था कि
"Courage is like a muscle. We strengthen it by use. अर्थात्
"पुरुषार्थ एक मांसपेशी सदृश है, जिसका उपयोग करके हम हम उसको सुदृढ़ करते हैं।"
एक ऐसा पुरुषार्थ ही ग्राम पाठशाला भी कर रही है और उसको इसमें निरंतर सफलता भी मिल रही है। और तो और यमुना विकास प्राधिकरण से भी हिम्मत करी तो अविश्वसनीय नतीजे सामने आए। और! नतीजे भी एक बड़ी पहल के रूप में। ग्राम पाठशाला धन्यवाद की पात्र तो है ही उसकी पहल स्पष्ट दर्शाती है कि इस मिशन में पवित्र भाव से लगे मानव संसाधनों पर मां सरस्वती की कृपा भी है।
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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