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साक्षात्कार (सुनपुरा ग्राम से अपने प्रयासों से एसएससी-सीजीएल प्रतियोगी परीक्षा में चयनित बालिका शैंकी से बातचीत)

(परिचय - प्रतियोगी परीक्षा में चयनित सुनपुरा की शैंकी दिवंगत रामवीर सिंह जी की सुपुत्री है।)
बातचीत
प्रश्न १. अपनी सफलता में आप ग्राम पाठशाला की क्या भूमिका समझती हैं?
उत्तर -  मेरे गांव में ग्राम पाठशाला अभी बनी नहीं है, पर जल्दी ही वो स्टार्ट होगी। मेरे गांव के पास एक लाइब्रेरी थी, जो  पहले एक आटा मिल का ऑफिस था। मिल के बंद होने के बाद उसके ऑफिस को लाइब्रेरी बना दिया गया और उसकी बहुत ही मामूली फीस तीन सौ रुपए थी। जिसमें यदि आप दे सकते हैं तो ठीक यदि नहीं तो कोई बाध्य नहीं। उस पाठशाला की वजह से मेरा रेगुलर शेड्यूल बना क्योंकि मैं रेगुलर शेड्यूल नहीं बना पा रही थी और मैं सफल रही।
प्रश्न २. आपने जिस प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाई है क्या आप उसी जॉब पर काम करते रहना चाहेंगे या फिर कुछ और प्रयास भी करने हैं?
उत्तर - जी, मैं बिलकुल काम करूंगी... लेकिन मैं एसएससी- सीजीएल में पुनः प्रयास करूंगी, क्योंकि जिस पोस्ट पर मेरा चयन हुआ है उसकी पूरे भारत में पोस्टिंग हो सकनी संभव है, जबकि मुझे घर के पास ही जॉब करनी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मेरी मां सिंगल पैरेंट हैं और मुझे उनके लिए यहां रहना ही होगा ..
प्रश्न ३. क्या आप अपने चयन की प्रतियोगिता में उसकी प्रक्रिया और अपनी परफॉर्मेंस से संतुष्ट है?
उत्तर - जी, बिलकुल। मैं संतुष्ट हूं।
प्रश्न ४. क्या अभी आप अध्ययनरत हैं?
उत्तर - जी हां, मैं अपना अध्ययन जारी रखे हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि मुझे पहले से बेहतर करने की कोशिश करनी है।
प्रश्न ५. समाज में आप अपनी भूमिका को कृपा कर समझाइए।
उत्तर - मैं  शिक्षा से ही सबको जागरूक करना जानती हूं विशेषतः बच्चों को, क्योंकि अभी बहुत सारे ऐसे शैक्षणिक क्षेत्र हैं जहां बच्चे जागरूक नहीं हैं प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में...  अन्य बालकों की तरह उन्हें भी बस एक मौका चाहिए..

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