कर अरे मन साधना, तू छोड़ दे हर कामना।
सामने आए समय का, कर संभलकर सामना।।
सार्थक कर जन्म मानव, जो मिला भगवान से।
कर्म जो भी तू करे, वो सब ही करना ध्यान से।
कर्म को स्वतन्त्रता तो, पाई है भगवान से।
कर्म को कर सार्थक पर, मात्र अपने ज्ञान से।
कर्म का अच्छा-बुरा भी, है जरूरी जानना।
सामने आए समय का, कर संभलकर सामना।।१।।
कुछ घटित ऐसा भी होता, जिस पर तेरा वश नहीं।
बात भी कुछ ऐसी होतीं, जिनमें कोई रस नहीं।
डूब मत जो हो गया है, होनी तो होकर रहे।
विधि ने साहस दिया, जो हर लगी ठोकर सहे!
बस कभी भी तू, निराशी डोर को न थामना।
सामने आए समय का, कर संभलकर सामना।।२।।
स्वयं से बढ़कर हितैषी, अन्य कोई है नहीं?
फिर बता अपना हितैषी, खोजता क्यूँ है कहीं?
समय बोलो कब रुका है, एक सा ये कब रहा?
समय तो अच्छा-बुरा, इस जगत में सबने सहा।
जो मिला उसको सदा, उपहार ईश्वर मानना!
सामने आए समय का, कर संभलकर सामना॥३।।
समय की इस डोर को तू, बस विधि पर छोड़ दे।
नाता जो अपनत्व का है, बस हरि से जोड़ ले।
मस्त होकर रह जगत में, और नित ही कर भजन।
स्वयं सब क्रन्दन मिटेंगे, और न अब कर मनन।
बस सदा पावन ही रखना, अपने मन की भावना।
सामने आए समय का, कर संभलकर सामना।।४।।
कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण'
यह भी है एक साधना!
🌱 साधना हेतु निवेदन 🌱
आज लोगों को लग रहा है कि गर्मी बहुत है? तो फिर AC का सहारा कब तक लेंगे? आज भारत में केवल वातावरण नियमन हेतु ही 500 करोड़ पेड़ों की आवश्यकता है और अभी तो यह शुरुआत भर है। यह जान लें कि 45°C से 49°C डिग्री को 55°C से 60°C होने में समय नहीं लगेगा व 56°C पर इंसान जीवित नहीं रहेगा। अभी से पौधे सोच-समझकर योजना के अनुसार लगाने होंगे, क्योंकि एक पौधे के परिपक्व होने में औसतन 5 से 7 साल लग जाएंगे। अब वर्षा ऋतु आने वाली है, तो दो पेड़ जरूर लगाएं। सब कुछ सरकार पर न छोड़ें। अपने और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए छायादार वृक्ष नीम,पीपल,बरगद, पाकड़, आम का लगाएं और इसे सुरक्षित रखने के लिए कोई-न-कोई उपाय भी करें।
यह सन्देश आगे बढता रहे, वृक्ष लगाए जाते रहें। समझिए कि -
वृक्ष ही जीवन हैं और वृक्षारोपण है एक साधना।
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आदर्श 'हिन्दू'
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