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ग्राम पाठशाला की पहल से रेलवे में चयनित मोहित कुमार से बातचीत

(यह बातचीत ग्राम दुजाना से रेलवे में चयनित युवक मोहित से हुई है, जिसने गांव में स्थापित पुस्तकालय को इसका श्रेय दिया है। अभी तक स्थापित पुस्तकालयों में दुजाना पुस्तकालय से एक दर्जन से अधिक बालक विविध प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित होने का गौरव पाकर ग्राम पाठशाला को गौरवान्वित कर चुके हैं। मोहित से बातचीत करना इसलिए महत्वपूर्ण समझा गया, क्योंकि उनके छोटे भाई को गुर्दे की समस्या है और उन्होंने नितांत विपरीत परिस्थितियों में अपनी तमाम जिम्मेदारियों को वहन करते हुए अपनी क्षमताओं का परिचय दिया है।)
                                    मोहित कुमार
संवाददाता - रेलवे में चयनित होने के बाद अब आपको कैसा लग रहा है और आपकी फैमिली कैसा महसूस कर रही है?
मोहित - बहुत अच्छा लग रहा है सर, क्योंकि परीक्षा की तैयारी से पहले मैं स्पोर्ट्स करता था। तब भी मैंने सोचा था कि मैं स्पोर्ट्स की तरफ से रेलवे को ही जॉइन करूंगा, लेकिन सर मेरी चोट के कारण मुझे स्पोर्ट्स छोड़ना पड़ा। तभी से मैंने तैयारी शुरू की और सर यह सब दुजाना में लाइब्रेरी खुलने से संभव हो पाया। मेरा बैकग्राउंड बिल्कुल भी एक अच्छे छात्र के रूप में नहीं था, बल्कि एक अच्छे खिलाड़ी के रूप में था सर। सर बहुत अच्छा लग रहा है, लेकिन टीम ग्राम पाठशाला अभी भी मुझे मोटिवेट करती है, सर। यह कहते हुए कि बेटा आपको अभी और अच्छे लेवल की तैयारी करनी है। सर, मेरी फैमिली भी मुझसे बहुत उम्मीद करती है।
संवाददाता - आपके भाई की तबियत खराब है और आपको नियुक्ति मिलने वाली है। यह दुविधा की स्थिति है।
जीवन में ऐसी दुविधा की स्थिति किसी के भी लिए उत्पन्न होने पर उसका सामना करने के लिए आपकी क्या सलाह है?
मोहित - हाँ सर, मेरी पूरी फैमिली ही इस दुविधा में है। सर, बताने में बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा कि मेरा छोटा भाई जिसकी उम्र कुल बाईस साल है उसकी दोनों किडनी फेल हो गई हैं सर। वह 2020 से बीमार है। तभी से मैं और पूरी फैमिली उसी में लगे हुए हैं। उसकी वीक मैं दो डायलिसिस होती हैं, सर। सर, सबसे पहले तो भगवान से दुआ  हैं कि किसी को भी  ऐसी स्थिति का सामना न करना पडे या अगर ऐसी समस्या कभी आ भी जाए तो उसका सामना करो उससे डरो  नहीं। रास्ते खुद ही निकल जाते हैं, सर।

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