यूपीएससी परीक्षा में चार टॉपर महिलाएं हैं, हर तीसरा उम्मीदवार एक महिला है और नौ सौ तीस उम्मीदवारों में से चौवन उम्मीदवार हिंदी भाषा में परीक्षा पास करते हैं, यह एक दूरगामी समाजशास्त्रीय संकेत देता है। देश की इस शीर्ष सेवा की संचालिका यूपीएससी अब इस नजर आने वाले बदलाव से समझने लगी है कि धाराप्रवाह अंग्रेजी में एक खास पैटर्न पर पूछे गए सवालों का एक खास तरीके से जवाब देना रटने की क्षमता को दर्शाता है।
इस शीर्ष सेवा में इतनी बड़ी संख्या में आने वाली महिलाएं न केवल महिला सशक्तिकरण को प्रेरित करेंगी बल्कि अन्य लड़कियों को भी पढ़ने, नौकरी करने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करेंगी।
बदलते परिणामों के साथ माता-पिता भी 'लड़की किसी और की दौलत' जैसी रूढ़िवादी सोच से बाहर आएंगे।
हिन्दी माध्यम से परीक्षा में सम्मिलित होकर चयनित हुए चौवन अभ्यर्थी इतिहास में अब तक के सर्वाधिक हैं, जिनमें से उनतीस ने हिन्दी साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना है।
आज भी ग्रामीण अंचलों के लाखों प्रतिभावान बच्चे हिन्दी माध्यम के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने के कारण अपेक्षाकृत छोटी नौकरियों के लिए ही उड़ान भर पाते हैं।
एक युवा कलेक्टर यदि गांव और गरीबी के कष्टों को झेलकर अपने वर्तमान पद पर पहुंचे तो जनसेवा के साथ-साथ जनसेवा भी होगी। (साभार: दैनिक भास्कर)
मां की गोद से ऊंचाइयों तक गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..." यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा। जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है। मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया। लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...
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