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वास्तविक सरोकार

    इतिहास के पन्नों में न जाने कितने आंदोलन दर्ज हैं और आमतौर पर ये सभी आंदोलन किसी न किसी के विरोध में शुरू किए गए। यही वज़ह रही कि इन आंदोलनों को सीमित समर्थन ही मिला, लेकिन जैसे ही एक ऐसा आंदोलन ग्राम पाठशाला नाम से शुरू हुआ जो किसी के विरोध के बजाय निर्माण के लिए चलाया गया, तो तमाम लोग दिल खोलकर निर्माण करने में लग गये। ऐसे गावों की सूची बहुत लंबी है तो उसका विवरण देना एक सुखद अहसास।
    ऐसे  निर्माण की एक स्मृति पलवल जिले के मीरपुर कौराली गाँव की है, जहाँ पर ग्राम प्रधान भाई रवि कुमार गाँव के युवाओं की लाइब्रेरी के लिये बिल्डिंग बनवा रहे हैं। टीम ग्राम पाठशाला ने कुछ दिनों पहले ही इस गाँव में जन-जागरण किया था। निर्माण की इस मुहिम को एक आंदोलन बनाने वाले रवि भाई जैसे कर्म योद्धाओं को टीम ग्राम पाठशाला नमन करती है।
भावुक मत होना दोस्तो! 
     अभी तो क्रांति शुरू हुई है। 
     हरियाणा के गुरुग्राम जिले के रिठोज गाँव में गाँव के लोग बड़े मन से अपने बच्चों के लिए एक सार्वजनिक लाइब्रेरी बना रहे हैं जिसमें लकड़ी की जगह पत्थर का प्रयोग किया जा रहा है।
     दरअसल, गाँव में लकड़ी में दीमक लगने की समस्या है तो गाँव के लोगों ने फैसला लिया कि वे अपने गाँव के बच्चों के लिए लाइब्रेरी में लकड़ी की जगह पत्थर का इस्तेमाल करेंगे।
     टीम ग्राम पाठशाला ने पिछले दिनों ही इस गाँव में लाइब्रेरी निर्माण के लिए जन-जागरण किया था और गाँव के लोगों ने टीम ग्राम पाठशाला की उपस्थिति में ही लाइब्रेरी निर्माण के लिए जरूरी पैसा आपसी दान से एकत्र कर लिया था। यह लाइब्रेरी इसी महीने बनकर तैयार भी हो जाएगी। 
इतनी बड़ी प्रेरणा..
     राजेश बंसल भाई गाजियाबाद जिले की लोनी तहसील में पार्षद हैं और लोनी में ही इनका घर भी है। इनकी कॉलोनी में बच्चों के पढ़ने के लिए लाइब्रेरी नहीं थी। बच्चो की परेशानी को देखते हुए राजेश भाई ने अपने घर के ही एक हिस्से में एक आधुनिक लाइब्रेरी स्थापित कर दी और वह इसे ‘नो प्रॉफिट नो लॉस’ की पॉलिसी पर न्यूनतम फीस पर चला रहे हैं। इतना ही नहीं आज इस विषय को लेकर चेतनता का आलम यह है कि वैवाहिक संस्कारों संबंधी निमंत्रण पत्रों पर भी इस मिशन का विवरण दिया जाने लगा है। 
लाल बहार

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