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पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में हो रहे प्रयास सदैव ही प्रशंसनीय रहे हैं। धीरे-धीरे ही सही लेकिन समाज में गंभीरता पुख़्ता तरीके से कम होती जा रही है। ठीक ऐसा ही पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में है भी है। अब यदि किसी भी क्षेत्र में गंभीरता में कमी होगी तो निश्चित ही अपेक्षित परिणाम भी नहीं आ पाएँगे। इसका दूसरे पक्ष को देखें तो पाएंगे कि इस दिशा में प्रयास करने वाले दोगुना लाभ भी ले लेते हैं। आइए इसको नवोन्मेषी प्रकृति के एक व्यक्ति के संकल्प से समझने का प्रयास करते हैं। यह व्यक्ति एक स्कूल चला रहा है और उस स्कूल की ऊर्जा आवश्यकताओं को उसने सौर ऊर्जा को अपनाकर पूरी तरह अपने काबू में करके ना केवल पर्यावरण को संरक्षित करने का काम किया है बल्कि भारी भरकम रकम की भी बचत की है। उनके अनुसार, "मैं पीछे मुड़‌कर नहीं देखता। कभी देखता और सोचता हूँ तो सिर्फ अपने पूर्वजों के विषय में जिन्होंने मुझको वक्त से सीखना और सीमितता में सब कुछ करना सिखाया। अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मैंने बहुत सोचा-विचारा और उनकी पूर्ति के लिए 'वन टाइम इन्वेस्टमेंट' को ध्यान में रखकर सोलर ऊर्जा का विकल्प चुना। सर्वप्रथम मैंने छोटा प्लांट लगाकर अपनी जरूरतें पूरी कीं और फिर मैं दृढ़ प्रतिज्ञ तरीके से अपने सोलर ऊर्जा प्लांट की क्षमता को बढ़वाता रहा। फिलवक्त मैं यदि अपने सोलार प्लांट और उसकी कार्यक्षमता का आकलन कर उस सबकी समीक्षा करता हूँ, तो मुझको यह अपने पैत्रक पूर्वजों के आशीषों के जैसा लगता है और लगता है कि मैं उनके स्वप्नों को सही रूप में साकार कर पा रहा है। प्रयास यदि और भी हों तो देश को निश्चित ही नई दिशा मिलेगी।"

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