अस्तित्व तो है बचाना
न्यून-सा अस्तित्व हमारा, इसको है महान बनाना।
खेतिहर जाति से हैं तो पथरीले रस्ते को है पार करना।।
सीधे-सच्चे होकर के भी हमको तो है मंजिल को पाना।
सीमित बुद्धिमता के साथ में माना डगर कठिन होगी।।
आत्मनिर्भरता-आत्मविश्वास संग विजय सामने ही होगी।
अड़चनों का आना तय है, उनसे बिलकुल नहीं घबराना।।
अपने बुलंद इरादों से ही आसमान को भी है झुकाना।।
ज्ञानबोध को बना अपना साथी, हमको है आगे बढ़ते जाना।
न्यून-सा अस्तित्व हमारा, इसको है महान बनाना।
मासिक 'उलझन सुलझन' की कामना
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